नकदी संकट से जूझ रही पाकिस्तान सरकार ने आर्थिक संकट के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर करने में देरी को जिम्मेदार ठहराते हुए अर्थव्यवस्था में नरमी के साथ-साथ अधिक मुद्रास्फीति की चेतावनी दी है। एक पाकिस्तानी अखबार के अनुसार वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी अपनी मासिक परिदृश्य रिपोर्ट में यह भी कहा कि राजनीतिक अस्थिरता देश को और अधिक मुद्रास्फीति की ओर ले जा रही है।
पड़ोसी देश में पिछले महीने के लिए अपने मुद्रास्फीति पूर्वानुमान के आंकड़े को रोकते हुए वहां के वित्त मंत्रालय ने अर्थव्यवस्था के निराशाजनक दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए कहा कि मासिक आर्थिक संकेतक, जो पिछले और वर्तमान संकेतकों के आधार पर आर्थिक विकास दर की भविष्यवाणी करने का माध्यम है वह धीमा हो गया है।
मंत्रालय ने कहा, 'मार्च में मुद्रास्फीति ऊपरी स्तर पर रह सकती है जैसा कि फरवरी में देखा गया था। उस समय यह 31.5 प्रतिशत थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि इस बार कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है, लेकिन बाजार को उम्मीद है कि कई नकारात्मक कदम उठाये जाने के कारण मुद्रास्फीति 36 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
वित्त मंत्रालय के आकलन के मुताबिक पाक में महंगाई दर 33 प्रतिशत
वित्त मंत्रालय के एक रूढ़िवादी आंतरिक आकलन ने मार्च में मुद्रास्फीति की दर लगभग 34 प्रतिशत बताई। मंत्रालय ने कहा कि बढ़ती कीमतों का एक संभावित कारण राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) कार्यक्रम से 1.1 अरब डॉलर के वित्तपोषण की खेप को अंतिम रूप देने में देरी से आर्थिक संकट और बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'स्थिरीकरण कार्यक्रम में देरी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट ने आर्थिक अनिश्चितता को बढ़ा दिया है, जिसके कारण मुद्रास्फीति की आशंका मजबूत बनी हुई है।
आईएमएफ से बेलआउट पैकेज हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान 6.5 अरब डॉलर के आईएमएफ बेलआउट पैकेज को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है, जिसे वाशिंगटन स्थित वैश्विक ऋणदाता ने 2019 में मंजूरी दी थी। हालांकि, इस बीच पेट्रोल सब्सिडी और वाणिज्यिक बैंकों से सीधे उधार लेने के प्रयासों जैसे इसके गलत कदमों ने नकदी की कमी वाले देश के लिए मामलों को और जटिल बना दिया है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने कहा है कि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) की संकुचनकारी मौद्रिक नीतियां भी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद नहीं कर रही हैं। एसबीपी ने इस महीने हुई पिछली मौद्रिक नीति के फैसले में नीतिगत दर को तीन प्रतिशत बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दिया था।