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OPS vs NPS: क्या सरकार पुरानी पेंशन योजना की बहाली से जुड़े प्रस्ताव पर विचार कर रही है? सीतारमण ने दिया जवाब

Mon, 11 Aug 2025 02:31 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

OPS vs NPS: क्या सरकार केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के संबंध में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल करने से जुड़े किसी प्रस्ताव पर विचार कर रही है? सोमवार को संसद वित्त मंत्री ने इस सवाल का जवाब दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पुरानी पेंशन योजना के बारे में लोकसभा में क्या कहा है? आइए जानते हैं, विस्तार से।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। - फोटो : PTI
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विस्तार
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क्या सरकार केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के संबंध में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल करने से जुड़े किसी प्रस्ताव पर विचार कर रही है? सोमवार को संसद वित्त मंत्री ने इस सवाल का जवाब दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में बताया कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत आने वाले केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के संबंध में पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल करने के लिए भारत सरकार के पास कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वित्त मंत्री ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकारी खजाने पर नहीं सहने योग्य राजकोषीय दायित्व के कारण सरकार ने ओपीएस से दूरी बना ली थी।

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एनपीएस एक परिभाषित अंशदान-आधारित योजना है जिसे 1 जनवरी 2004 को या उसके बाद सेवा में शामिल होने वाले केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों (सशस्त्र बलों को छोड़कर) के लिए शुरू किया गया था। वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों के लिए पेंशन से जुड़े लाभों में सुधार लाने और एनपीएस में संशोधन के उपाय सुझाने के मकसद से तत्कालीन वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी।

उन्होंने कहा कि हितधारकों के साथ समिति के विचार-विमर्श के आधार पर, एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को एनपीएस के तहत एक विकल्प के रूप में पेश किया गया। इसका उद्देश्य एनपीएस के तहत कवर किए गए केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद लाभ प्रदान करना है। सीतारमण ने कहा कि यूपीएस की विशेषताओं, जिसमें परिवार की परिभाषा भी शामिल है, इस तरह से डिजाइन की गई हैं कि लाभुकों को पर्याप्त भुगतान सुनिश्चित हो सके और साथ ही फंड की वित्तीय स्थिरता भी बनी रहे।
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वित्त मंत्री ने कहा कि एनपीएस के तहत यूपीएस का विकल्प चुनने वाले सरकारी कर्मचारी सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु या अशक्तता या विकलांगता के आधार पर उसकी सेवामुक्ति की स्थिति में सीसीएस (पेंशन) नियम, 2021 या सीसीएस (असाधारण पेंशन) नियम, 2023 के तहत लाभ प्राप्त करने के विकल्प के लिए भी पात्र होंगे। उन्होंने कहा कि यूपीएस को सरकार की ओर से 24 जनवरी, 2025 को एक अधिसूचना जरिए एनपीएस के तहत एक विकल्प के रूप में पेश किया गया है।

उन्होंने कहा कि यूपीएस के तहत, न्यूनतम 25 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्ति से ठीक पहले, बारह महीने के औसत मूल वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर सेवानिवृत्ति पर सुनिश्चित भुगतान दिए जाने की सुविधा है।
उन्होंने कहा कि कम सेवा अवधि के मामले में आनुपातिक भुगतान स्वीकार्य होगा।

एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए सीतारमण ने कहा कि मार्च 2020 से मार्च 2024 तक घरेलू वित्तीय देनदारियों के स्टॉक में लगभग 5.5 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई है। इसी अवधि के दौरान घरेलू वित्तीय परिसंपत्तियों के स्टॉक में 20.7 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि 2023-24 तक परिवारों की शुद्ध वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक से मिली जानकारी के अनुसार, बैंकों के खुदरा ऋणों की पहुंच मार्च 2024 में 30.94 प्रतिशत से मामूली रूप से बढ़कर मार्च 2025 में 31.48 प्रतिशत हो गई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि खुदरा ऋणों में सालाना आधार पर वृद्धि की गति मार्च 2024 के 17.61 प्रतिशत से घटकर मार्च 2025 में 14.05 प्रतिशत हो गई है।

वित्त मंत्री ने लोकसभा में बताया कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के खुदरा ऋण खंड में परिसंपत्ति की गुणवत्ता काफी हद तक स्थिर है। मार्च 2025 तक सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात 1.18 प्रतिशत है। इसके अलावा, असुरक्षित खुदरा ऋणों की हिस्सेदारी खुदरा ऋणों के 25 प्रतिशत तथा समग्र सकल अग्रिमों के 8.3 प्रतिशत पर अपेक्षाकृत कम है।

वित्त मंत्री ने बताया कि सांख्यिकी व कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से प्रकाशित हालिया आंकड़ों के अनुसार, शुद्ध घरेलू वित्तीय बचत 2022-23 में 13.3 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 15.5 लाख करोड़ रुपये हो गई है। इसलिए भारतीय बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता से जुड़ी कोई प्रणालीगत चिंता फिलहाल नहीं है।

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