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प्याज की बढ़ती कीमतों पर काबू के लिए क्या कदम उठा रही है सरकार, जानिए यहां

Thu, 07 Nov 2019 11:49 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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राजधानी दिल्ली सहित उत्तर भारत के तमाम राज्यों में प्याज की कीमतों ने आसमान छू लिया है। मानसून में देरी के चलते खरीफ सत्र में प्याज की बुआई में देरी हुई। वहीं कई राज्यों बाढ़ के चलते प्याज की फसल को नुकसान हुआ है, जिसकी वजह से प्याज की कीमतों में आग लगी है।

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महाराष्ट्र के लासलगांव स्थित प्याज की सबसे बड़ी मंडी में इसकी कीमतों में जोरदार उछाल आया है। इस संदर्भ में व्यापारियों का कहना है कि बेमौसम बारिश के चलते प्याज की फसलों को नुकसान हुआ है, जिसकी वजह से कीमतें बढ़ी हैं और आगे भी इनमें उछाल जारी रह सकता है। 

बीते कुछ महीनों में प्याज की कीमतें लगभग दोगुना हुई हैं। अगस्त में जहां एक किलो प्याज के लिए लोग 25 रुपये चुकाते थे, वहीं अक्तूबर माह में एक किलो प्याज 90 से 100 रुपये प्रति किलो के भाव से बिका। 

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बढ़ती कीमतों की वजह से केंद्र सरकार भी अलर्ट मोड पर है। सरकार ने बुधवार को आनन-फानन में घरेलू बाजार में प्याज की आपूर्ति सुधार के लिए धूम्र-उपचार (फ्यूमिगेशन) सहित कई नियमों को 30 नवंबर तक लचीला करने का एलान किया है। इसके साथ ही चार देशों अफगानिस्तान, इजिप्ट, तुर्की और ईरान से आयात करने का फैसला लिया गया है। 

नवंबर अंत तक घट सकती हैं कीमतें

इसी बीच सरकार द्वारा पहले से मंगाई गई 2,500 टन प्याज की पहली खेप 12 नवंबर को भारत पहुंच जाएगी। केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि सरकार हर संभव कोशिश कर रही है और नवंबर के अंत तक या दिसंबर की शुरुआत में कीमतें घट सकती हैं।

इतना था खुदरा मूल्य

उपभोक्ता मामलों के सचिव अविनाश के श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी समिति की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया। इस बैठक में देश में प्याज की कीमतों और उपलब्धता की समीक्षा की गई। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में प्याज का खुदरा मूल्य मंगलवार को 80 रुपये किलो था, जबकि चेन्नई में 70 रुपये किलो और मुंबई में 50 रुपये किलो था।

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Ram Vilas Paswan - फोटो : ANI

कीमतों को थामने के लिए प्रयास कर रही सरकार

केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने माना कि घरेलू उत्पादन में कमी से खुदरा बाजार में प्याज 30-40 फीसदी महंगी 80 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। उन्होंने कहा कि सरकार कीमतों को थामने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। पासवान ने शीर्ष अधिकारियों के साथ प्याज की मांग, आपूर्ति और कीमतों की समीक्षा की। 

बड़ी चुनौती है कीमतों को थामना

सरकार भले ही अगले हफ्ते तक 2500 टन आयातित प्याज बाजार में आने की बात कह रही है, लेकिन इसके बाजार में पहुंचने में तीन से चार दिन और लगेंगे। 

इसलिए 30 से 40 फीसदी कम हुआ उत्पादन

इस साल बाढ़, वर्षा की अनियमितता और साइक्लोन के चलते इस बार प्याज के उत्पादन में 30 से 40 फीसदी की गिरावट आई है। महाराष्ट्र में 70 फीसदी प्याज की फसल खराब हो गई है। महीने के अंत तक केवल राजस्थान से ही प्याज मिलेगा। देश में रोजाना प्याज की मांग दो लाख टन है, जिसकी पूर्ति सरकार के लिए फिलहाल आसान नहीं होगा।

ये कदम उठा चुकी है सरकार

  • पासवान ने कहा कि सरकार प्याज की कीमतें थामने के लिए कच्ची और प्रसंस्कृत प्याज के आयात पर पहले ही प्रतिबंध लगा चुकी है।
  • सरकार कारोबारियों पर स्टॉक लिमिट लगा चुकी है, जिससे जमाखोरी रोकी जा सके।
  • इसके अलावा ग्राहकों को राहत देने के लिए 23.40 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेच रही है।
  • सरकार अपने बफर स्टॉक में से 57,000 टन प्याज निकाल चुकी है।
हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा किए गए सरकारी डाटा के एक विश्लेषण के मुताबिक, आलू के बाद देश में प्याज की खपत सबसे अधिक है। औसत भारतीय घर सब्जियों के कुल खर्च का 13 फीसदी प्याज पर खर्च करते हैं। 

तीन चक्रों में उगता है प्याज

  • गर्मियों या खरीफ की फसल (अप्रैल-जून में बोई गई) अक्तूबर के मध्य से बाजारों में आती है। 
  • देर से खरीफ की फसल (सितंबर में बोई गई) जनवरी से मार्च तक बाजार में आती है। 
  • सर्दियों या रबी फसल (अक्तूबर और नवंबर के बीच उगाई गई) मार्च और अप्रैल के दौरान बाजारों में पहुंचती है।
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