कीमतों को थामने के लिए प्रयास कर रही सरकार
केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने माना कि घरेलू उत्पादन में कमी से खुदरा बाजार में प्याज 30-40 फीसदी महंगी 80 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। उन्होंने कहा कि सरकार कीमतों को थामने के लिए हर संभव कदम उठा रही है। पासवान ने शीर्ष अधिकारियों के साथ प्याज की मांग, आपूर्ति और कीमतों की समीक्षा की।
बड़ी चुनौती है कीमतों को थामना
सरकार भले ही अगले हफ्ते तक 2500 टन आयातित प्याज बाजार में आने की बात कह रही है, लेकिन इसके बाजार में पहुंचने में तीन से चार दिन और लगेंगे।
इसलिए 30 से 40 फीसदी कम हुआ उत्पादन
इस साल बाढ़, वर्षा की अनियमितता और साइक्लोन के चलते इस बार प्याज के उत्पादन में 30 से 40 फीसदी की गिरावट आई है। महाराष्ट्र में 70 फीसदी प्याज की फसल खराब हो गई है। महीने के अंत तक केवल राजस्थान से ही प्याज मिलेगा। देश में रोजाना प्याज की मांग दो लाख टन है, जिसकी पूर्ति सरकार के लिए फिलहाल आसान नहीं होगा।
ये कदम उठा चुकी है सरकार
- पासवान ने कहा कि सरकार प्याज की कीमतें थामने के लिए कच्ची और प्रसंस्कृत प्याज के आयात पर पहले ही प्रतिबंध लगा चुकी है।
- सरकार कारोबारियों पर स्टॉक लिमिट लगा चुकी है, जिससे जमाखोरी रोकी जा सके।
- इसके अलावा ग्राहकों को राहत देने के लिए 23.40 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज बेच रही है।
- सरकार अपने बफर स्टॉक में से 57,000 टन प्याज निकाल चुकी है।
हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा किए गए सरकारी डाटा के एक विश्लेषण के मुताबिक, आलू के बाद देश में प्याज की खपत सबसे अधिक है। औसत भारतीय घर सब्जियों के कुल खर्च का 13 फीसदी प्याज पर खर्च करते हैं।
तीन चक्रों में उगता है प्याज
- गर्मियों या खरीफ की फसल (अप्रैल-जून में बोई गई) अक्तूबर के मध्य से बाजारों में आती है।
- देर से खरीफ की फसल (सितंबर में बोई गई) जनवरी से मार्च तक बाजार में आती है।
- सर्दियों या रबी फसल (अक्तूबर और नवंबर के बीच उगाई गई) मार्च और अप्रैल के दौरान बाजारों में पहुंचती है।