जोमैटो-स्विगी जैसे ऑनलाइन खाना मंगवाने वाले एप पर जिस मैकचिकन बर्गर के लिए 283 रुपये खर्च करने पड़ते हैं, ओएनडीसी पर उसे 110 रुपये में ही खरीदा जा सकता है। वेज स्टीम्ड मोमो 170 के बजाय सिर्फ 85 रुपये में लिया जा सकता है। दरों में अंतर दिखाती ऐसी दर्जनों तस्वीरें बीते कुछ दिनों से इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं। दरअसल, ओएनडीसी यानी डिजिटल कॉमर्स के लिए ओपन नेटवर्क को ई-कॉमर्स के क्षेत्र में बड़े बदलाव की तरह देखा जा रहा है।
विक्रेता-खरीदार का सीधा संपर्क
ओएनडीसी मोबाइल एप नहीं, बल्कि प्लेटफॉर्म है। विक्रेता व खरीदार के बीच सीधा संपर्क बनाता है और मध्यस्थ बने थर्ड पार्टी ई-कॉमर्स एप्स की जरूरत नहीं रहती। यह अप्रैल, 2022 में लॉन्च हुआ, फिर दिल्ली, बंगलूरू सहित कई शहरों में शुरू हुआ। सरकार की कोशिश छोटे कारोबारियों को भी बड़ी कंपनियों की टक्कर का प्लेटफॉर्म देने की है।
कम दामों में आसान उपलब्धता
वर्ष 2030 तक देश में करीब 42 करोड़ लोग ऑनलाइन खरीदारी कर रहे होंगे। 2021 के 3,800 करोड़ डॉलर के मुकाबले वर्ष 2026 तक कुल कारोबार 14 हजार करोड़ डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। ओएनडीसी का मकसद वैश्विक कंपनियाें का एकाधिकार रोकना है। इससे न सिर्फ चीजें आसानी से मिलेंगी, दाम भी बेहद कम होंगे।