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Oilmeal Export: चीन को ऑयलमील के निर्यात में 20 गुना उछाल, जानें कैसे भारत मिला इसका फायदा

Thu, 19 Mar 2026 04:43 PM IST
Riya Dubey बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत से चीन को ऑयलमील निर्यात अप्रैल 2025 फरवरी 2026 में 20 गुना बढ़कर 7.79 लाख टन पहुंच गया, जिसमें सबसे ज्यादा रेपसीड मील का निर्यात हुआ। सस्ती कीमतों और कनाडा पर चीन के टैरिफ के कारण भारत को फायदा मिला। 
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भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala
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विस्तार
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चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों (अप्रैल 2025-फरवरी 2026) में भारत से चीन को ऑयलमील निर्यात में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। उद्योग संगठन सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) के अनुसार, यह निर्यात 20 गुना से अधिक बढ़कर 7.79 लाख टन तक पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा केवल 38,240 टन था। ऑयलमील दरअसल तेल निकालने के बाद बचा हुआ ठोस हिस्सा होता है, जो बीजों (जैसे सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी आदि) से तेल निकालने के बाद बचता है।

रेपसीड मील और कैस्टरसीड मील का हुआ सबसे ज्यादा निर्यात 

इस दौरान चीन ने भारत से मुख्य रूप से 7,71,435 टन रेपसीड मील और 7,581 टन कैस्टरसीड मील आयात किया। SEA के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता के मुताबिक, भारतीय रेपसीड मील की प्रतिस्पर्धी कीमतें इस बढ़त की प्रमुख वजह रहीं। फिलहाल भारतीय रेपसीड मील की कीमत करीब 225 डॉलर प्रति टन है, जो यूरोपीय सप्लायर्स के मुकाबले काफी सस्ती है। रेपसीड मील सरसों या कैनोला के बीज से तेल निकालने के बाद बचा हुआ ठोस हिस्सा होता है। भारत में इसे आम बोलचाल में सरसों की खली भी कहा जाता है।

कनाडाई निर्यात महंगा होने से भारत को मिला फायदा 

मेहता ने बताया कि मार्च 2025 में चीन ने कनाडा के रेपसीड मील और ऑयल पर 100% टैरिफ लगाया था, जिससे कनाडाई निर्यात महंगा हो गया और चीन ने वैकल्पिक सप्लायर के तौर पर भारत का रुख किया। इसका सबसे ज्यादा फायदा भारतीय निर्यातकों को मिला।

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हालांकि, अब स्थिति बदल सकती है। चीन ने 1 मार्च 2026 से कनाडा पर लगाए गए 100% टैरिफ को 31 दिसंबर 2026 तक के लिए निलंबित कर दिया है। ऐसे में भारतीय निर्यातकों को चीनी बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

कुल ऑयलमील निर्यात आंकड़े रहे कमजोर 

इस बीच, कुल ऑयलमील निर्यात के आंकड़े कमजोर रहे हैं। फरवरी 2026 में निर्यात 22% घटकर 2.57 लाख टन रह गया, जो एक साल पहले 3.30 लाख टन था। वहीं, पूरे वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में कुल निर्यात 11% घटकर 34.93 लाख टन रहा, जो पिछले साल 39.33 लाख टन था।

एसईए ने वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव को भी बड़ी चिंता बताया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे भारत के ऑयलमील निर्यात पर असर पड़ा है।

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करीब 20% निर्यात, जो पश्चिम एशिया जाता है, और 15% निर्यात, जो यूरोप जाता है, लॉजिस्टिक बाधाओं के कारण जोखिम में है। शिपिंग कंपनियां इन क्षेत्रों से बच रही हैं, जिससे जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाना पड़ रहा है। इससे ट्रांजिट समय 10-15 दिन बढ़ रहा है और लागत भी बढ़ रही है।

उद्योग संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत के कृषि निर्यात, खासकर ऑयलमील, की प्रतिस्पर्धा क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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