वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) पेट्रोल और डीजल बेचकर भारी मुनाफा कमा रही हैं। आईसीआरए की एक हालिया रिपोर्ट में यह दावा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोल जैसी ओएमसी पेट्रोल पर 15 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 12 रुपये प्रति लीटर का मुनाफा कमा रही हैं।
आईसीआरए (इनवेस्टमेंट इन्फॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख- कॉरपोरेट रेटिंग गिरीश कुमार कदम ने कहा, "आईसीआरए का अनुमान है कि सितंबर 2024 (17 सितंबर तक) में अंतरराष्ट्रीय उत्पाद कीमतों के मुकाबले पेट्रोल के लिए ओएमसी का मुनाफा 15 रुपये प्रति लीटर और डीजल के लिए 12 रुपये प्रति लीटर से अधिक था।"
मार्च 2024 से इन ईंधनों की खुदरा बिक्री मूल्य (आरएसपी) में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पिछली बार 15 मार्च, 2024 को पेट्रोल और डीजल पर 2 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई थी। हाल के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट के कारण तेल विपणन कंपनियों की मार्केटिंग मार्जिन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आईसीआरए की रिपोर्ट भी इस तथ्य का समर्थन करती है।
आईसीआरए ने कहा, "कच्चे तेल की कीमतों में कमी के साथ हाल के सप्ताहों में भारतीय तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के लिए ऑटो ईंधन की खुदरा बिक्री पर विपणन मार्जिन में सुधार हुआ है।"
विशेषज्ञों का सुझाव है कि इतने भारी मार्केटिंग मार्जिन के साथ ओएमसी के पास पेट्रोल और डीजल की कीमतों को कम करके उपभोक्ताओं को राहत देने का पर्याप्त मौका है। इससे पहले, पेट्रोल और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी स्वीकार किया कि राज्य के स्वामित्व वाली तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के लिए 2023-24 का वित्तीय वर्ष शानदार रहा है।
मंत्रालय ने यह भी नोट किया कि वित्त वर्ष 2023-24 के लिए ओएमसी का संयुक्त लाभ 86,000 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 25 गुना अधिक है। पूरे 2023-24 वित्त वर्ष में, एचपीसीएल (हिंदुस्तान पेट्रोल पंप) ने पिछले वर्ष के 6,980 करोड़ रुपये के नुकसान के मुकाबले 16,014 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड शुद्ध मुनाफा कमाया। आईओसीएल (इंडियन ऑयल) ने भी ऐतिहासिक रूप से सर्वश्रेष्ठ रिफाइनरी थ्रूपुट, बिक्री मात्रा और शुद्ध लाभ के साथ बेहतरीन प्रदर्शन किया। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए बीपीसीएल का कर पश्चात लाभ 26,673 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 13 गुना अधिक है।