भारतीय शेयर बाजार में आज से प्री-ओपन ऑक्शन सेशन के नियमों में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) द्वारा शुरू किए गए इस नए सिस्टम का मुख्य उद्देश्य शुरुआती कीमतों के निर्धारण (प्राइस डिस्कवरी) को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। इसके साथ ही, अंतिम क्षणों में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव को भी कम किया जा सकेगा।
यह नया नियम इक्विटी कैश मार्केट के सभी शेयरों (SME, InvITs/REITs और डेरिवेटिव्स सहित) पर लागू होगा। प्री-ओपन का कुल समय पहले की तरह सुबह 09:00 से 09:15 बजे तक ही रहेगा, लेकिन इसके भीतर ऑर्डर डालने, संशोधन और मैचिंग की समय-सीमा में बदलाव किया गया है।
इस 15 मिनट के समय को चार अलग-अलग स्लॉट में बांटा गया है:
इस फैसले से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी। एसबीआई सिक्योरिटीज के सुदीप शाह का कहना है कि अब ट्रेडर्स के लिए सुबह के पहले 5 मिनट बेहद अहम हो जाएंगे, विशेष रूप से तब जब रातभर में कोई बड़ी खबर आई हो या बाजार बड़े गैप के साथ खुलने जा रहा हो। वहीं एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर डेरिवेटिव एंड टेक्निकल एनालिस्ट नंदिश शाह के अनुसार, नए नियम का पूरा फोकस ऑर्डर एंट्री टाइमिंग में बदलाव और टाइम-प्राइस प्रायोरिटी के आधार पर मैचिंग सुनिश्चित करने पर है।
ओपनिंग प्राइस का निर्धारण मांग और आपूर्ति के सिद्धांत (इक्विलिब्रियम प्राइस) के आधार पर होगा। यह वह कीमत होती है जिस पर सबसे अधिक वॉल्यूम एग्जीक्यूट हो सकता है। यदि एक से अधिक कीमतें इस मानदंड पर खरी उतरती हैं, तो न्यूनतम ऑर्डर असंतुलन (मिनिमम ऑर्डर इमबैलेंस) वाली कीमत को चुना जाएगा। यदि फिर भी स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तो पिछले दिन के क्लोजिंग प्राइस के सबसे करीब वाली कीमत को ओपनिंग प्राइस माना जाएगा।