नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) पर यूनिक निवेशकों की संख्या 23 सितंबर को 12 करोड़ के पार चली गई। निवेशकों की संख्या में 1 करोड़ का इजाफा महज आठ महीनों के दौरान हुआ है। एक्सचेंज ने गुरुवार को यह जानकारी दी। एनएसई ने कहा कि चार में से एक निवेशक महिला है। इस वर्ष जनवरी में एक्सचेंज पर निवेशकों की संख्या 11 करोड़ के पार चली गई।
स्टॉक एक्सचेंज ने एक बयान जारी कर कहा, "पंजीकृत निवेशकों की संख्या एनएसई के परिचालन शुरू होने के 14 साल बाद एक करोड़ के आंकड़े को छू गई, अगले एक करोड़ की संख्या जुड़ने में लगभग सात साल लगे, उसके बाद एक करोड़ की संख्या जुड़ने में लगभग साढ़े तीन साल लगे तथा उसके बाद एक करोड़ की संख्या जुड़ने में एक साल से थोड़ा अधिक समय लगा।"
दूसरे शब्दों में, मार्च 2021 में पंजीकृत निवेशक आधार को 4 करोड़ का आंकड़ा छूने में 25 साल से अधिक का समय लगा। इसके बाद 1 करोड़ निवेशक लगभग 6-7 महीनों में जुड़े। डिजिटलीकरण, फिनटेक तक बेहतर पहुंच, मध्यम वर्ग का विस्तार और सहायक नीतिगत उपायों के कारण निवेशक आधार का समय के साथ तेज विस्तार हुआ है।
23 सितंबर, 2025 तक एनएसई में पंजीकृत निवेशक खातों की कुल संख्या 23.5 करोड़ हो गई। इसमें अब तक किए गए सभी ग्राहक पंजीकरण शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि ग्राहक एक से अधिक ट्रेडिंग सदस्यों के साथ पंजीकरण कर सकते हैं।
एनएसई की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 12 करोड़ पंजीकृत निवेशकों की औसत आयु लगभग 33 वर्ष है। यह पांच वर्ष पहले 38 वर्ष थी। इनमें से लगभग 40 प्रतिशत की आयु 30 वर्ष से कम है। इसके साथ ही देश भर में भागीदारी भी बढ़ी है। निवेशक आधार भारत के 99.85 प्रतिशत पिन कोड क्षेत्रों को कवर करता है।
एनएसई ने कहा, "31 अगस्त, 2025 तक तीन राज्य ऐसे थे, जहां अद्वितीय पंजीकृत निवेशकों की संख्या एक करोड़ से अधिक थी, जिसमें महाराष्ट्र 1.9 करोड़ निवेशकों के साथ शीर्ष पर था, उसके बाद उत्तर प्रदेश 1.4 करोड़ निवेशकों के साथ दूसरे और गुजरात 1.03 करोड़ निवेशकों के साथ इस सूची में नवीनतम राज्य था।" चालू वित्त वर्ष में 23 सितंबर तक बेंचमार्क निफ्टी 50 सूचकांक ने 7 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। निफ्टी 500 सूचकांक ने इस अवधि के दौरान 9.3 प्रतिशत का लाभ दिया है।
कौन होते हैं यूनिक निवेशक?
भारतीय शेयर बाजार में यूनिक इन्वेस्टर्स उन निवेशकों को कहा जाता है जिनकी पहचान एक अलग पैन (PAN) नंबर के आधार पर की जाती है। यानी अगर कोई निवेशक कई डीमैट अकाउंट या अलग-अलग ब्रोकर के माध्यम से लेन-देन करता है, तो भी उसे केवल एक यूनिक इन्वेस्टर ही माना जाता है। इस तरह यूनिक इन्वेस्टर्स की संख्या यह दर्शाती है कि वास्तव में कितने अलग-अलग व्यक्ति बाजार में सक्रिय हैं, न कि कुल कितने अकाउंट खुले हुए हैं।