आनंद सुब्रमण्यम और चित्रा रामकृष्ण
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दिल्ली की एक सीबीआई अदालत ने बुधवार को एनएसई को-लोकेशन मामले में ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के पूर्व एमडी के सलाहकार आनंद सुब्रमण्यम को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। गौरतलब है कि जांच टीम ने सुब्रमण्यम को हिमालयन योगी बताया है जो कि पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण को सलाह देता था।
चित्रा रामकृष्ण को सात दिन की रिमांड
इससे पहले नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को-लोकेशन मामले में एनएसई की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण की मुश्किलें बढ़ाते हुए विशेष अदालत ने उन्हें सात दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया था। गौरतलब है कि केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी चित्रा रामकृष्ण को अदालत के समक्ष पेश किया था और एनएसई को-लोकेशन मामले में उनकी 14 दिन की हिरासत की मांग की थी। गिरफ्तारी के बाद अधिकारियों ने कहा था कि सीबीआई ने रामकृष्ण से लगातार तीन दिनों तक पूछताछ की और उनके आवास पर तलाशी ली, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने कहा कि वह उचित जवाब नहीं दे रही थीं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के एक वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक की सेवाएं भी लीं, जिन्होंने भी उनसे पूछताछ की। अधिकारियों ने कहा कि मनोवैज्ञानिक भी इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि एजेंसी के पास उन्हें गिरफ्तार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
चित्रा पर लगे हैं गंभीर आरोप
चित्रा रामकृष्ण अप्रैल 2013 से दिसंबर 2016 तक एनएसई की एमडी और सीईओ थी। गौरतलब है कि चित्रा पर हिमालयन योगी के इशारे पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का संचालन करने और संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप है। इस संबंध में बीते दिनों सीबीआई ने एनएसई के पूर्व ग्रुप ऑपरेटिंग ऑफिसर (जीओओ) आनंद सुब्रमण्यम को चेन्नई स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था और दावा किया था कि वही हिमालयन योगी हैं। आनंद सुब्रमण्यम पर आरोप है कि वह एनएसई के कामकाज में दखल देते थे। इसके साथ ही वह एनएसई की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण को सलाह दिया करते थे और वह उनके इशारे पर काम किया करती थीं।
क्या है को-लोकेशन स्कैम?
शेयर खरीद-बिक्री के केंद्र देश के प्रमुख नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के कुछ ब्रोकरों को ऐसी सुविधा दे दी गई थी, जिससे उन्हें बाकी के मुकाबले शेयरों की कीमतों की जानकारी कुछ पहले मिल जाती थी। इसका लाभ उठाकर वे भारी मुनाफा कमा रहे थे। इससे संभवत: एनएसई के डिम्यूचुलाइजेशन और पारदर्शिता आधारित ढांचे का उल्लंघन हो रहा था। धांधली करके अंदरूनी सूत्रों की मदद से उन्हें सर्वर को को-लोकेट करके सीधा एक्सेस दिया गया था। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड को इस संबंध में एक अज्ञात सूचना मिली। इसमें आरोप लगाया गया था कि एनएसई के अधिकारियों की मदद से कुछ ब्रोकर पहले ही जानकारी मिलने का लाभ उठा रहे हैं। एनएससी में खरीद-बिक्री तेजी को देखते हुए घपले की रकम पांच साल में 50,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।