अप्रवासी भारतीयों ने चलन से बाहर हो चुके पुराने नोटों को बदलने के लिए तय सीमा में विस्तार की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार की तरफ से कालेधन पर काबू के लिए नोटबंदी एक साहसिक फैसला है, लेकिन विदेश में रहने की वजह से उन्हें अपने पुराने भारतीय नोटों को बैंकों में जमा कराने के लिए और समय चाहिए। अप्रवासी भारतीयों के एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्रालय को इस संबंध में पत्र लिखा है। उन लोगों ने नोट बदलने के लिए सरकार से और छह माह का समय देने की गुजारिश की है।
सरकारी फैसले के मुताबिक, आगामी 30 दिसंबर तक 1,000-500 रुपये के पुराने नोटों को अपने-अपने खाते में जमा कराया जा सकता है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, ग्लोबल ऑर्गेनाइजेशंस ऑफ पीपुल ऑफ इंडिया ओरिजिन (जीओपीआईओ) की तरफ से हाल ही में भेजे गए पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले को साहसिक कदम बताया गया है। अप्रवासी भारतीयों ने कहा है कि भारत सरकार के इस फैसले से उनकी चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि कई अप्रवासी भारतीय अपने पिछले भारत दौरे के दौरान पुराने नोट अपने घरों में छोड़ आए हैं ताकि भविष्य में भारत आने पर उन नोटों का इस्तेमाल कर सकें।
कई अप्रवासी भारतीयों ने यह भी कहा है कि आने वाले समय में भारत में हमेशा के लिए लौट आने की मंशा से उन्होंने अपने घरों में पुराने नोटों की नकदी रख दी थी। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, अप्रवासी भारतीयों ने कहा है कि पिछले 10 सालों में उन्होंने भारत भ्रमण के दौरान जितनी मात्रा में विदेशी करेंसी को भारतीय करेंसी में बदलवाया है, उसे भारतीय बैंक में जमा करने की इजाजत दी जाए ताकि उन्हें नए नोट में बदला जा सके।
उनका कहना है कि कई प्रकार के कारोबार में उलझे होने व आने-जाने में लगने वाले समय की वजह से वे आगामी 30 दिसंबर तक पुराने नोटों को बैंकों में जमा करने में समर्थ नहीं है। इसलिए उन्हें इस काम के लिए और छह माह का समय दिया जाए। अप्रवासी भारतीयों ने सरकार से यह भी मांग की है कि भारत आने पर उनके पुराने नोटों को बदलवाने के लिए विशेष जगह तय की जाए और 2.5 लाख रुपये की सीमा में भी बढ़ोतरी की जाए।