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NPS में बड़ा बदलाव: स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों को भी मिलेंगे निवेश के दो नए विकल्प, जानिए क्या फायदा

Tue, 07 Jul 2026 07:43 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एनपीएस के नए नियमों के तहत अब स्वायत्त निकायों (सीएबी) के कर्मचारियों को भी मिलेंगे दो नए निवेश विकल्प। जानें कैसे 75% तक इक्विटी निवेश के साथ बढ़ सकता है आपका पेंशन फंड। पूरी खबर के लिए अभी पढ़ें।
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क्या है एनपीएस और ओपीएस? - फोटो : istock
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विस्तार
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केंद्र सरकार के स्वायत्त निकायों (सीएबी) के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और काम की खबर है। सरकार ने नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के तहत इन कर्मचारियों को दो अतिरिक्त निवेश विकल्प चुनने की मंजूरी दे दी है। वित्त मंत्रालय के इस नए फैसले से अब स्वायत्त निकायों के लाखों कर्मचारियों को अपने बुढ़ापे को आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित बनाने और रिटायरमेंट प्लानिंग को बेहतर ढंग से डिजाइन करने की बड़ी आजादी मिलेगी।

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आइए समझते हैं कि सरकार का यह नया फैसला क्या है और इससे आपके पेंशन फंड पर क्या असर पड़ेगा।

सरकार ने एनपीएस नियमों में क्या बड़ा बदलाव किया है?

सरकार ने केंद्रीय स्वायत्त निकायों (सीएबी) के उन कर्मचारियों के लिए निवेश के दायरे को बढ़ा दिया है जो नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) के तहत कवर्ड हैं। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) की 13 नवंबर, 2025 की अधिसूचना को अब स्वायत्त निकायों के कर्मचारियों पर भी लागू कर दिया है। इससे पहले निवेश के ये अतिरिक्त विकल्प सिर्फ केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए ही उपलब्ध थे, लेकिन अब इनका दायरा बढ़ाकर स्वायत्त निकायों तक कर दिया गया है।

कौन से हैं वे दो नए विकल्प और इनमें कितना मिलेगा इक्विटी का फायदा?

सरकार ने जिन दो नए निवेश विकल्पों को मंजूरी दी है, वे सीधे तौर पर शेयर बाजार यानी इक्विटी में निवेश के अलग-अलग प्रतिशत से जुड़े हैं। पहला विकल्प - LC-75-हाई है। पहले इसका नाम एग्रेसिव लाइफ था। यह विकल्प उन कर्मचारियों के लिए बेहतरीन है जो कम उम्र में अधिक जोखिम लेने और लंबे समय में अपने निवेश पर ज्यादा रिटर्न (ग्रोथ) पाना चाहते हैं। इसमें फंड मैनेजर कुल पेंशन निवेश का 75 फीसदी तक हिस्सा इक्विटी (शेयरों) में निवेश कर सकते हैं। 

दूसरा विकल्प एग्रेसिव लाइफ साइकिल फंड (पूर्व नाम बैलेंस्ड लाइफ साइकिल फंड - बीएलसी) है। यह विकल्प उन लोगों के लिए है जो ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते और रिटर्न के साथ-साथ स्थिरता भी चाहते हैं। इसमें इक्विटी निवेश की सीमा अधिकतम 50 फीसदी तक तय की गई है। इस विकल्प की खास बात यह है कि कर्मचारी की उम्र 45 वर्ष होने के बाद धीरे-धीरे इक्विटी में निवेश का प्रतिशत अपने आप कम होने लगता है, जिससे रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर फंड सुरक्षित रहता है।

इस फैसले से कर्मचारियों को क्या फायदा होने वाला है?

वित्त मंत्रालय के अनुसार, इस फैसले का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय स्वायत्त निकायों के एनपीएस सब्सक्राइबर्स को निवेश में अधिक लचीलापन देना है। अब कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत जोखिम उठाने की क्षमता, भविष्य के वित्तीय लक्ष्यों और रिटायरमेंट की आवश्यकताओं के अनुसार अपनी पेंशन राशि का निवेश कर सकेंगे। इससे न केवल कर्मचारियों के पास अपने निवेश को चुनने का अधिकार मजबूत होगा, बल्कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) भी पहले की तुलना में इन कर्मचारियों के लिए अधिक आकर्षक और फायदेमंद बन जाएगी।

यह नया नियम कब से और कैसे लागू होगा?

इस फैसले के जमीन पर क्रियान्वयन के लिए सरकार ने अपनी प्रशासनिक तैयारियां शुरू कर दी हैं। वित्त मंत्रालय ने सभी संबंधित प्रशासनिक मंत्रालयों और विभागों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आने वाले सभी केंद्रीय स्वायत्त निकायों (सीएबी) को निवेश के इन नए विकल्पों के उपलब्ध होने के बारे में तुरंत सूचित करें। इसके बाद कर्मचारी अपने नियोक्ता के माध्यम से इन विकल्पों को चुन सकेंगे।

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एनपीएस के तहत निवेश के इन दो नए विकल्पों का स्वायत्त निकायों तक विस्तार पेंशन नियोजन को एक नया और आधुनिक रूप देगा। अब कर्मचारी बाजार की तेजी का फायदा उठाकर अधिक पेंशन फंड जमा करने या फिर स्थिरता के साथ संतुलित विकास का मार्ग चुनने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।

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