सरकार ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) पर काम का बोझ कम करने के लिए बड़ी पहल की है। दरअसल सरकार ने कंपनी कानून के अंतर्गत कंपनियों को बंद करने के नियम अधिसूचित कर दिए हैं। कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कंपनी (समापन) नियम, 2020 अधिसूचित कर दिए, जो एक अप्रैल से प्रभावी हो जाएंगे। कंपनियों को बंद करने से जुड़ी याचिकाएं कारोबार (टर्नओवर) की सीमाओं और चुकता पूंजी सहित कई शर्तों से जुड़ी होती हैं।
उन्होंने कहा, ‘इससे जुड़ा नियमों का मसौदा सिर्फ छोटी कंपनियों को उपलब्ध करा दिया गया था, लेकिन अंतिम नियम एक करोड़ रुपये या उससे कम कीमत की संपदाओं वाली कंपनियों; जिन्होंने 25 लाख रुपये से ज्यादा जमा नहीं लिया है या जिसने 50 लाख रुपये से ज्यादा सुरक्षित कर्ज लेने वाली या 50 करोड़ से ज्यादा टर्नओवर वाली या एक करोड़ रुपये से ज्यादा चुकता पूंजी वाली कंपनियों को उपलब्ध करा दिए गए हैं।’
उन्होंने कहा, ‘नियमित कंपनियों पर लागू प्रक्रिया का ज्यादातर हिस्सा ऐसी कंपनियों पर लागू रहेगा, जो संक्षिप्त प्रक्रिया को अपना सकते हैं। इसलिए यह अभी अस्पष्ट है कि क्या केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में जाने से ही प्रक्रिया तेज हो जाएगी।’ वर्तमान में स्वैच्छिक समापन के मामले प्रमुख रूप से दिवालिया कानून के अंतर्गत लिए जाते हैं। नियम कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत अधिसूचित किए गए हैं।