आज दुनिया भर में ज्यादातर लोगों की पहुंच मोबाइल तक है। इसमें इंटरनेट की मदद से लोग दुनिया-जहां की खबरों से लेकर व्यापार और नौकरी से जुड़े कामों को उंगलियां घुमाकर कर लेते हैं। यही वजह है कि नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री माइकल स्पेंस ने कहा कि मोबाइल के जरिये इंटरनेट सुविधा से समावेशी विकास संभव हो पा रहा है और रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
डिजिटल लेन-देन में आई तेजी
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के स्टर्न बिजनेस स्कूल की ओर से आयोजित ऑनलाइन गोष्ठी में शुक्रवार को माइकल स्पेंस ने कहा कि भारत में मोबाइल इंटरनेट तक लोगों की पहुंच होने से हाल के समय में डिजिटल लेन-देन में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्षेत्र को खोलने से सूचना प्रौद्योगिक क्षेत्र में रोजगार के काफी अवसर बन रहे हैं। मोबाइल इंटरनेट के विस्तार में उपकरण की कीमत और डाटा की दरों में कमी के साथ गति बढ़ने जैसे कारकों की मुख्य भूमिका है।
स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र पर भी प्रभाव
स्पेंस ने कहा कि मोबाइल भुगतान प्रणाली से बड़े पैमाने पर डाटा उत्पन्न होता है, जबकि एआई और मशीन प्रशिक्षण में सूचनाओं के अंतराल को पाटने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि देश के स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा क्षेत्रों में सुधार पर इंटरनेट का खासा प्रभाव रहा है और भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था के कई मोर्चों पर अग्रणी है तथा यह अभी सिर्फ एक शुरुआत है।