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ब्रिक्स करेंसी पर बड़ा बयान: क्या साझा मुद्रा की जगह स्थानीय करेंसी में ही होता रहेगा व्यापार? सामने आया जवाब

Sat, 12 Sep 2026 08:02 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद विदेश मंत्रालय के सचिव सुधाकर दलेला ने स्पष्ट किया कि साझा ब्रिक्स मुद्रा लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और बीपीटीएफ के काम पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
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क्या आने वाली है ब्रिक्स करेंसी। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन के बाद विदेश मंत्रालय ने साझा ब्रिक्स करेंसी को लेकर उठ रही तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने शनिवार को स्पष्ट किया कि वर्तमान में ब्रिक्स देशों के लिए एक साझा मुद्रा लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने बताया कि सदस्य देशों का मुख्य ध्यान द्विपक्षीय व्यापार को अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं में निपटाने पर केंद्रित रहेगा, जिससे लेन-देन की लागत को कम किया जा सके।

साझा ब्रिक्स मुद्रा को लेकर विदेश मंत्रालय ने क्या रुख साफ किया?

18वें ब्रिक्स सम्मेलन के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव सुधाकर दलेला ने कहा कि ब्रिक्स के भीतर साझा मुद्रा बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के निपटान पर काफी समय से चर्चा चल रही है और यह कोई नया विषय नहीं है। 

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विदेश मंत्रालय के अनुसार, स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान का मुख्य उद्देश्य मौजूदा वैश्विक भुगतान और सेटलमेंट प्रणाली को बदलना या हटाना नहीं है। इसके बजाय, इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार ढांचे के पूरक के रूप में देखा जा रहा है ताकि दो देशों के बीच होने वाले कारोबार की लागत को घटाया जा सके और समग्र वैश्विक व्यापार में सुधार किया जा सके।

'नई दिल्ली घोषणापत्र' में व्यापार निपटान को लेकर क्या सहमति बनी?

18वें ब्रिक्स सम्मेलन में अपनाए गए 'नई दिल्ली घोषणापत्र' में ब्रिक्स स्थानीय मुद्राओं के माध्यम से व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए जारी चर्चाओं को स्वीकार किया गया है। घोषणापत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि सभी सदस्य देशों की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान किया जाएगा, क्योंकि इस मामले में 'सबके लिए एक ही नियम' लागू नहीं हो सकता।

स्थानीय मुद्रा में व्यापार के व्यावहारिक क्रियान्वयन के लिए गठित 'ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स' (बीपीटीएफ) को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए हैं:

  • क्रॉस-बॉर्डर सिस्टम का अध्ययन: टास्क फोर्स भुगतान और मैसेजिंग चैनलों के क्रॉस-बॉर्डर इंटरऑपरेबिलिटी का अध्ययन कर रही है।
  • सुरक्षित और पारदर्शी विकल्प: बीपीटीएफ को ऐसे व्यावहारिक समाधानों पर काम जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया है जो तेज, कम लागत वाले, अधिक सुलभ, कुशल, पारदर्शी और सुरक्षित हों।

भारत की अध्यक्षता में हो रही 18वें सम्मेलन की प्रमुख बातें क्या?

भारत की 8 महीने की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। ये बैठकें विभिन्न मंत्रालयों, कार्य समूहों, विषयगत क्लस्टरों और व्यापारिक सत्रों के स्तर पर संपन्न हुईं।

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सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स नेताओं ने वर्तमान वैश्विक संघर्षों और आर्थिक अनिश्चितताओं के प्रभाव पर भी विस्तार से चर्चा की। इसमें निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर आम सहमति रही:

  • कूटनीति और संवाद पर जोर: सभी नेताओं ने मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए कूटनीति और वार्ता को अनिवार्य बताया।
  • लेन-देन लागत में कमी: क्रॉस-बॉर्डर व्यापार को सुगम और सस्ता बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

ब्रिक्स के इस रुख का वैश्विक व्यापार पर क्या असर होगा?

विदेश मंत्रालय के इस बयान से साफ है कि ब्रिक्स देश किसी नई साझा मुद्रा की जगह अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं को व्यापार में प्राथमिकता देंगे। स्थानीय मुद्राओं में सौदों का निपटान होने से सदस्य देशों के कारोबारियों के लिए मुद्रा विनिमय दर का जोखिम और ट्रांजैक्शन कॉस्ट कम होगी। आगे चलकर ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स की प्रगति यह तय करेगी कि सदस्य देशों के बीच भुगतान प्रणाली कितनी तेज और सुरक्षित बनती है।

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