De-dollarisation Row ब्रिक्स मुद्रा से जुड़ी चर्चा पर बोलते हुए आरबीआई गवर्नर ने कहा कि यह विचार समूह के एक सदस्य की ओर से प्रस्तुत किया गया है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इस पर कुछ चर्चाओं के अलावा कोई प्रगति नहीं हुई है।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार बताया कि भारत की अपने व्यापार को 'डॉलर मुक्त' करने की कोई योजना नहीं है और वह केवल अन्य तरीकों से जोखिम कम करने पर विचार कर रहा है।
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वह अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकी से संबंधित उस प्रश्न का उत्तर दे रहे थे कि यदि ब्रिक्स देश अमेरिकी डॉलर से दूर जाने का निर्णय लेते हैं तो उन्हें 100 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। दास ने यहां केंद्रीय बैंक मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, "जहां तक भारत का सवाल है, हमने डॉलर को समाप्त करने आदि के संबंध में कोई कदम नहीं उठाया है।"
ब्रिक्स मुद्रा के बारे में उन्होंने कहा कि यह विचार समूह के एक सदस्य की ओर से प्रस्तुत किया गया है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इस पर कुछ चर्चाओं के अलावा कोई प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश विश्व भर में फैले हुए हैं। उन्होंने बताया कि आपसी निकटता ने यूरोपीय संघ के लिए एकल मुद्रा की सफलता में मदद की है।
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दास ने कहा कि भारत के प्रयास वोस्ट्रो खातों की अनुमति देने और स्थानीय मुद्रा में व्यापार लेनदेन निपटाने के लिए दो देशों के साथ समझौते करने तक सीमित हैं। उन्होंने कहा, "इसका मूलतः उद्देश्य हमारे व्यापार के जोखिम को कम करना है। एक मुद्रा पर निर्भरता कभी-कभी मूल्यवृद्धि या मूल्यह्रास के कारण समस्या का कारण बन सकती है। निश्चित रूप से हमारा उद्देश्य डॉलर मुक्त कारोबार करना नहीं है, ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन ही नहीं है।"