वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 20 अगस्त को राज्य मंत्रिस्तरीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेंगी। इस बैठक के दौरान में जीएसटी में व्यापक सुधार के लिए केंद्र का प्रस्ताव रखा जाएगा। जिससे कर की दरों में कटौती होगी और आम उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में नरमी आएगी। सूत्रों के अनुसार जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने पर मंत्रिसमूह (जीओएम) की दो दिवसीय बैठक 20-21 अगस्त को नई दिल्ली में होगी।
सूत्रों ने बताया कि दरों को युक्तिसंगत बनाने संबंधी समिति के अलावा दो दिवसीय बैठक में क्षतिपूर्ति उपकर व स्वास्थ्य व जीवन बीमा पर गठित मंत्रिसमूह के सदस्य भी शामिल होंगे। एक सूत्र के अनुसार, जीएसटी 2.0 का मकसद जीएसटी सुधार के पीछे के केंद्र के दृष्टिकोण को सामने रखना है। हालांकि केंद्र जीओएम का सदस्य नहीं है, लेकिन केंद्रीय वित्त मंत्री की उपस्थिति और उनके संबोधन से जीओएम को केंद्र के प्रस्ताव के पीछे के विचार और विचार प्रक्रिया की बेहतर समझ मिलेगी।"
केंद्र की ओर से प्रस्तावित जीएसटी सुधार ऐसे समय में आ रहे हैं जब जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की अवधि समाप्त होने वाली है और विभिन्न क्षेत्रों के लिए दरों को युक्तिसंगत बनाने की योजनाचल रही है। इसके अलावा, आम आदमी को राहत देने के लिए एक मंत्री समूह स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम की दरों दरों में बदलाव पर विचार कर रहा है। जीएसटी परिषद ने इससे पहले तीन मुद्दों पर तीन अलग-अलग मंत्री समूह गठित किए थे।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दरों को युक्तिसंगत बनाने तथा स्वास्थ्य व जीवन बीमा पर गठित मंत्री समूह के संयोजक हैं, जबकि वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी क्षतिपूर्ति उपकर पर गठित मंत्री समूह के संयोजक हैं। केंद्र ने 5 और 18 प्रतिशत की दो स्लैब संरचना का प्रस्ताव दिया है, जिसमें वस्तुओं को 'योग्यता' और 'मानक' श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है और वर्गीकरण में अपनाया गया व्यापक सिद्धांत मध्यम वर्ग, एमएसएमई और कृषि क्षेत्र के लिए कर का बोझ कम करना है।
केंद्र के प्रस्ताव में वर्तमान 12 प्रतिशत स्लैब में शामिल 99 प्रतिशत वस्तुओं को 5 प्रतिशत में तथा 28 प्रतिशत स्लैब में शामिल 90 प्रतिशत वस्तुओं और सेवाओं को 18 प्रतिशत स्लैब में शामिल करने का प्रावधान है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में जीएसटी सुधारों को लागू करके नागरिकों को दिवाली का उपहार देने का वादा किया था। उन्होंने कहा था कि इससे कर की दरें कम होंगी और आम आदमी को लाभ होगा।
पीएम की ओर से जीएसटी में सुधार की घोषणा के तुरंत बाद, वित्त मंत्रालय ने अपनी 'अगली पीढ़ी' के जीएसटी सुधार की बात कही। यह सुधार तीन स्तंभों -संरचनात्मक सुधार, दर युक्तिकरण और अनुपालन में आसानी- पर आधारित है।
केंद्र की प्रस्तावित दो स्लैब संरचना वाली मध्यम वर्ग समर्थक 'नेक्स्ट जेन जीएसटी' के राजस्व प्रभाव को लेकर चिंताओं के बीच, सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि केंद्र राज्यों के साथ राजस्व साझा करने में समान रूप से भागीदार है और उसके प्रस्ताव में समय के साथ बढ़ती खपत से राजस्व में वृद्धि की उम्मीद है।
मौजूदा वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था के तहत, राजस्व केंद्र और राज्यों के बीच बराबर-बराबर बांटा जाता है। इसके अलावा, वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार, विभाज्य कर पूल में केंद्र के हिस्से का 41 प्रतिशत राज्यों को आवंटित किया जाता है।
एक सरकारी सूत्र ने कहा, "जीएसटी में क्या संग्रह किया जा रहा है और क्या एकत्र किया जाएगा, इस पर केंद्र व राज्य की समान चिंता है। जीएसटी परिषद के सदस्य होने के नाते, दोनों समान भागीदार हैं। ऐसी स्थिति में, क्या यह अपेक्षा करना उचित है कि भारत सरकार राज्यों को क्षतिपूर्ति देने के लिए एक दाता के रूप में बैठेगी?"
वर्तमान में, वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) एक चार-स्तरीय संरचना है जिसमें कर की दरें क्रमशः 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत और 28 प्रतिशत हैं। खाद्य और आवश्यक वस्तुओं पर या तो शून्य या 5 प्रतिशत की दर से कर लगता है, जबकि विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर 28 प्रतिशत की दर से कर लगता है।