शहरी भारतीय अपनी सेवानिवृत्ति को लेकर काफी चिंतित हैं। एक सर्वे में दावा किया गया है कि शहरी भारतीयों का सेवानिवृत्ति सूचकांक 44 है, जिसका मतलब है कि 56% लोग समय पर सेवानिवृत्त होने के लिए तैयार ही नहीं हैं। देश के मेट्रो, टीयर-1 और 2 के 28 शहरों में किए सर्वे में खुलासा हुआ है कि 10 में से नौ भारतीयों को अपनी सेवानिवृत्ति के लिए बचत न कर पाने की चिंता है। उनका मानना है कि महामारी के बाद नौकरियों पर अनिश्चितता बढ़ती जा रही, जबकि महंगाई व अन्य खर्चों में भी लगातार इजाफा हो रहा।
मैक्स लाइफ इंश्योरेंस के एमडी-सीईओ प्रशांत त्रिपाठी व कार्वी इनसाइट की सीईओ सोनिया पाल ने कहा, सर्वे में 63% ने अच्छी सेहत को सेवानिवृत्ति के समय पहली प्राथमिकता बताया है। वहीं, 29% ने वित्तीय मदद व 8 फीसदी ने सामाजिक सहयोग को महत्व दिया है। अभी तीन में से एक भारतीय सेवानिवृत्त होना ही नहीं चाहता, 19% लोग 56-60 साल के बीच सेवानिवृत्ति चाहते हैं। 12% ने 60-65 साल में सेवानिवृत्ति की इच्छा जताई है। ब्यूरो
पश्चिमी क्षेत्र की तैयारी बेहतर
मेट्रो शहरों और पश्चिमी क्षेत्र के लोगों की सेवानिवृत्ति के लिए तैयारी बेहतर है, जबकि उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्र के लोग सबसे कम तैयार हैं। पश्चिमी क्षेत्र का सेवानिवृत्ति सूचकांक 49 है, जबकि पूर्वी क्षेत्र 45 अंक के साथ दूसरे पायदान पर है। उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्र का सूचकांक 42 है। शहर के हिसाब से देखें तो मेट्रो के 100 में से 47 लोगों की तैयारी पुख्ता है, जबकि टीयर-2 के 44 व टीयर-1 के 43 फीसदी लोग ही तैयारी पूरी कर सके हैं।
47% लोग कर रहे निवेश
सर्वे के मुताबिक, 47 फीसदी शहरी नागरिक सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक रूप से स्वतंत्र रहने के लिए अभी से निवेश कर रहे हैं। 38 फीसदी लोग अपनी जीवनशैली को बनाए रखने के लिए निवेश कर रहे। निवेश करने वाले 70 फीसदी लोग सेवानिवृत्ति के बाद जरूरत की राशि को लेकर सजग हैं, जबकि 80 फीसदी ने इसके लिए पहले से तैयारी करने की बात कही है। चिंता की बात ये है कि 45 फीसदी लोगों ने सेवानिवृत्ति के बाद बच्चों पर आश्रित रहने की बात कही है। सर्वे में महज 24 फीसदी ने ही सेवानिवृत्ति के लिए बचत को जरूरी बताया है।