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1 अक्तूबर से क्या-क्या बदलेगा?: एलपीजी ईकेवाईसी, बैंक एफडी और टीडीएस जुड़े नए नियम, जानें आप पर क्या असर

Wed, 30 Sep 2026 02:57 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

1 अक्तूबर 2026 से कई महत्वपूर्ण वित्तीय नियम बदल रहे हैं। एलपीजी ई केवाईसी, बैंक एफडी ब्याज दर, एनआरआई टीडीएस फॉर्म 141 और बर्थ सर्टिफिकेट पर नए दिशानिर्देश लागू। जानिए आम नागरिकों पर इसका क्या असर होगा। अभी पूरी खबर पढ़ें।
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1 अक्तूबर 2026 से बदल जाएंगे ये नए नियम। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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1 अक्तूबर 2026 से आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नए महीने की शुरुआत के साथ ही एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की ब्याज दरें, एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीद पर टीडीएस नियम और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के पंजीकरण शुल्क से जुड़े दिशानिर्देश प्रभावी हो रहे हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) और संबंधित विभागों द्वारा जारी ये नए नियम ग्राहकों के लिए पारदर्शिता बढ़ाने, वित्तीय धोखाधड़ी रोकने और कर अनुपालन को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से लागू किए जा रहे हैं।

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LPG गैस सिलिंडर की ई-केवाईसी कैसे करवाएं? - फोटो : Amar Ujala AI

एलपीजी सिलेंडर डिलीवरी और सब्सिडी के नियमों में क्या नया बदलेगा?

रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए 1 अक्तूबर से डिलीवरी और सब्सिडी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने हेतु दो मुख्य सुरक्षा मानक लागू हो रहे हैं। 
  • अनिवार्य बायोमेट्रिक ईकेवाईसी: सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी रीफिल प्राप्त करने के लिए उन उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन या ई-केवाईसी पूरा करना अनिवार्य होगा, जिन्होंने अब तक इसे पूरा नहीं किया है।
  • ओटीपी आधारित डिलीवरी: एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के समय अब केवल कागजी रसीद दिखाना काफी नहीं होगा। ग्राहकों को अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर प्राप्त वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) सत्यापन के बाद ही सिलेंडर की डिलीवरी मिलेगी। इसका मुख्य उद्देश्य एलपीजी सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकना है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा - फोटो : PTI

आरबीआई ने बैंक एफडी दरों को लेकर क्या निर्देश दिए हैं?

बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में पैसे जमा करने वाले ग्राहकों और बड़े निवेशकों के लिए आरबीआई ने ब्याज दरों में पारदर्शिता लाने हेतु नए नियम तय किए हैं।
  • सभी शाखाओं में समान ब्याज दर: बैंकों के लिए अब अनिवार्य होगा कि वे एक ही तारीख को बुक की गई समान जमा राशि के लिए अपनी सभी शाखाओं में एक समान ब्याज दर की पेशकश करें।
  • बल्क डिपॉजिट में पारदर्शिता: बड़े डिपॉजिट यानी बल्क डिपॉजिट पर दी जाने वाली ब्याज दरों का खुलासा बैंकों को प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे तक अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अनिवार्य रूप से करना होगा।

निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री - फोटो : ANI

एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने पर टीडीएस से जुड़े नियम बदलेंगे?

यदि आप किसी अनिवासी भारतीय (एनआरआई) से अचल संपत्ति खरीद रहे हैं, तो 1 अक्तूबर से टैक्स कटौती और रिपोर्टिंग के नियम अधिक सख्त कर दिए गए हैं।
  • फॉर्म 141 फाइलिंग: गैर-निवासी भारतीयों से संपत्ति खरीदने वाले भारतीय निवासी व्यक्तियों  और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए अब 'फॉर्म 141' दाखिल करना अनिवार्य होगा।
  • शेड्यूल E में ब्योरा: इस फॉर्म के साथ एक नया 'शेड्यूल E' जोड़ना होगा, जिसमें संपत्ति बिक्री पर हुए पूंजीगत लाभ, काटे गए टीडीएस और भुगतान से जुड़ी पूरी जानकारी विस्तार से दर्ज करनी होगी।

school documents - फोटो : AI Generated

जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र में देरी से पंजीकरण कराने पर क्या नियम लागू होंगे?

1 अक्तूबर से जन्म और मृत्यु पंजीकरण में देरी करने पर नियमों को काफी सख्त कर दिया जाएगा।
  • 21 दिन की समय सीमा: मानक 21 दिनों की विंडो  के बाद देरी से कराए जाने वाले पंजीकरणों पर कड़ा जुर्माना ढांचा लागू किया गया है।
  • सख्त प्रशासनिक मंजूरी: 21 दिन की अवधि बीत जाने के बाद लेट रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अब हलफनामा जमा करना होगा। इसके साथ ही देरी की अवधि के आधार पर तहसीलदार, जिला रजिस्ट्रार, एसडीएम या जिलाधिकारी से औपचारिक प्रशासनिक मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य होगा।
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देश में LPG की कोई कमी नहीं- सरकार - फोटो : ANI

क्या पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की कीमतों में भी बदलाव होगा?

हर महीने की आखिरी तारीख को ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अपने उत्पादों के कीमतों की समीक्षा करने के बाद उनमें बदलाव करती है। अगर ऐसा होता है तो पेट्रोल, डीजल, सीएनजी, पीएनजी, एटीटी और रसोई गैस जैसे पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों भी बदलाव दिख सकता है।  

1 अक्तूबर 2026 से लागू हो रहे वित्तीय क्षेत्र के ये प्रमुख बदलाव सीधे तौर पर आम नागरिकों की जेब और कागजी प्रक्रियाओं को प्रभावित करेंगे। जहां एलपीजी और एफडी से जुड़े नियम उपभोक्ताओं को धोखाधड़ी से बचाकर वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाएंगे, वहीं टीडीएस और पंजीकरण के नए नियम कर व प्रशासनिक अनुपाल को मजबूत करेंगे। समय रहते ई-केवाईसी पूरी कराने और नए कर नियमों का पालन करने से किसी भी संभावित असुविधा या जुर्माने से बचा जा सकता है।
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