भाजपा सांसद और वित्त प्रवर समिति के अध्यक्ष बैजयंत जय पांडा ने मंगलवार को भारत के कर कानूनों को आसान बनाने के लिए हो रहे प्रयासों पर बात की। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित आयकर विधेयक का उद्देश्य कर नीतियों या दरों में बदलाव किए बिना करदाताओं के लिए अनुपालन को आसान बनाना है।
पांडा ने कहा कि नए मसौदा विधेयक में आयकर अधिनियम की शब्द संख्या लगभग 50 प्रतिशत घटाकर लगभग 5 लाख शब्दों से 2.5 लाख कर दी गई है। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में, पिछले 11 वर्षों में कई पुराने कानूनों में बदलाव किया गया है। इसी क्रम में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल कहा था कि आयकर को भी सरल बनाने के लिए इसमें बदलाव किया जाएगा।"
पांडा ने आगे कहा, "मंत्रालय ने इस पर काम किया है और कुछ महीने पहले संसद में नए आयकर विधेयक का एक आसान संस्करण प्रस्तुत किया है, जिसमें शब्द संख्या को 50 प्रतिशत घटाकर लगभग 5 लाख शब्दों से लगभग 2.5 लाख शब्द कर दिया गया है...बहुत सरल सूत्र और सारणियां दी गई हैं, ताकि यह सरल हो जाए।"
पांडा ने इस कदम के पीछे के मकसद के बारे में भी बात की। पांडा ने साफ किया, "हमारा काम कर नीति या कर दरों में बदलाव करना नहीं था, बल्कि यह सुनिश्चित करना था कि अधिनियम सरल हो।" पांडा ने सोमवार को लोकसभा में नए आयकर विधेयक पर प्रवर समिति की रिपोर्ट अपनी सिफारिशों के साथ पेश की। हाल ही में, नए आयकर विधेयक पर संसदीय पैनल की रिपोर्ट लोकसभा में पेश की गई। अपनी रिपोर्ट में, पैनल ने परिभाषाओं को सख्त बनाने, अस्पष्टताओं को दूर करने और नए कानून को मौजूदा ढांचों के अनुरूप बनाने के लिए महत्वपूर्ण बदलावों का सुझाव दिया है।
पैनल ने आयकर विधेयक 2025 की जांच की, जो आयकर अधिनियम 1961 की भाषा और संरचना को सरल बनाने का प्रयास करता है और अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। आयकर विधेयक, 2025 फरवरी में संसद में पेश किया गया था और विस्तृत जांच के लिए इसे प्रवर समिति को भेज दिया गया था।
समिति ने अपनी 4,584 पन्नों की रिपोर्ट में हितधारकों के सुझावों के आधार पर प्रारूपण में कई सुधारों की पहचान की है, जो उनके अनुसार नए विधेयक की स्पष्टता और सुस्पष्ट व्याख्या के लिए आवश्यक हैं। संसदीय पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कुल 566 सुझाव/सिफारिशें दी हैं।