अमेरिका के डबलिन, ओहायो में "Early Diab EDI" नामक एक नया डिवाइस Type 2 डायबिटीज मेलिटस (T2DM) की भविष्यवाणी में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए तैयार है। ये डिवाइस कार्डिनल हेल्थ (Cardinal Health) के सीनियर डेवलपमेंट ऑपरेशंस इंजीनियर और रिसर्च साइंटिस्ट मनोज चौधरी वट्टिकुटी और वर्जीनिया इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की सीनियर डेटा एनालिस्ट निहारिका रेड्डी मीनिगेया ने तैयार किया है। यह अत्याधुनिक मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का इस्तेमाल करता है और डायबिटीज की रोकथाम और शुरुआती स्तर पर ही इलाज करने की दिशा में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
Type 2 डायबिटीज मेलिटस (T2DM) दरअसल एक पुरानी बीमारी (क्रोनिक डिजीज) है जो इंसुलिन प्रतिरोध और खराब इंसुलिन स्राव के कारण ब्लड शुगर के लेवल को बढ़ा देती है। डायग्नोस्टिक की मौजूदा प्रक्रियाएं अक्सर जटिल और धीमी होती हैं। लेकिन "Early Diab EDI" डिवाइस से डायबिटीज के जोखिम का पहले से पता लगाना संभव होगा, जिससे समय पर हस्तक्षेप किया जा सकता है और बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।
मशीन लर्निंग स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक गेम-चेंजर साबित हुआ है, विशेषकर जटिल बीमारियों जैसे T2DM के लिए। मनोज और निहारिका का ये रिसर्च, मशीन लर्निंग मॉडल की ताकत को दिखाता है, जो बड़े डेटा सेट्स का विश्लेषण कर उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान पारंपरिक तरीकों से अधिक तेजी से और एक आसान तरीके से कर सकता है। "Early Diab EDI" डिवाइस इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स और विशाल डेटा सेट्स का एकीकरण करके T2DM स्क्रीनिंग को आसान बनाती है।
डायबिटीज के जोखिम को प्रबंधित करने में रोकथाम एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। "Early Diab EDI" उपकरण का एल्गोरिदम उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान में मदद करता है, जिससे डॉक्टर जीवनशैली और डायट में बदलाव जैसे शुरुआती हस्तक्षेप कर सकते हैं। बीमारी की शुरुआती पहचान से उसकी रोकथाम पर एक गहरा असर हो सकता है और इससे बीमारी को बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी। अध्ययनों में यह पाया गया है कि जीवनशैली सुधार कार्यक्रमों में भाग लेने वाले लोगों में T2DM के मामले 30-60% तक घट गए हैं।
"Early Diab EDI" डिवाइस Big Data और मशीन लर्निंग की ताकत का इस्तेमाल करते हुए T2DM से जुड़ी आनुवंशिक, जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों के बीच संबंधों का विश्लेषण करता है। इसके अलावा, यह डिवाइस रियल टाइम में रिस्क वैल्यूएशन भी देता है। इससे बीमारी को लेकर तुरंत हस्तक्षेप की संभावना बढ़ती है। यह डिवाइस स्वास्थ्य असमानताओं को भी हल करती है, जिससे विभिन्न जनसंख्याओं के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ावा मिलता है।
मनोज और निहारिका का यह रिसर्च हेल्थ केयर क्षेत्र में एक नया दृष्टिकोण पेश करता है, जो DevOps, AIOps और डेटा विज्ञान को मिलाकर स्वास्थ्य समाधानों में नवाचार का प्रतीक है। मनोज की AI के साथ यात्रा तब शुरू हुई जब उन्होंने IT संचालन में क्रांतिकारी बदलाव लाने की इसकी क्षमता को पहचाना। कार्डिनल हेल्थ में उनके काम ने पारंपरिक सिस्टम प्रबंधन की सीमाओं को दर्शाया, जिसके बाद उन्होंने AIOps और MLOps का अन्वेषण किया। क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमेशन और सुरक्षा में अपनी भूमिकाओं के माध्यम से उन्होंने यह समझाया कि AI का उपयोग करके कैसे स्मार्ट, स्व-चिकित्सीय सिस्टम बनाए जा सकते हैं, जो सक्रिय रूप से समस्याओं की भविष्यवाणी और समाधान करते हैं।