भारतीय कॉर्पोरेट परिवेश में करियर, निर्णय-प्रक्रिया और नवाचार को प्रभावित करने वाली अदृश्य शक्तियों पर केंद्रित एक नई अंग्रेज़ी नॉन-फिक्शन पुस्तक चर्चा में है। Breaking Politics- Empowering Experts (ब्रेकिंग पॉलिटिक्स-एम्पावरिंग एक्सपर्ट्स) शीर्षक से प्रकाशित यह नई पुस्तक रोशन भोंडेकर और वैभव देशपांडे ने मिलकर लिखी है। इसे 26 जनवरी 2026 को भारत के गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रकाशित किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित राजमंगल पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक कॉर्पोरेट राजनीति के उन पहलुओं की पड़ताल करती है, जो औपचारिक प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणालियों से परे जाकर पदोन्नति, नेतृत्व चयन और रणनीतिक निर्णयों को प्रभावित करते हैं।
रोशन भोंडेकर और वैभव देशपांडे दोनों 2012 में भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद के मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम के सहभागी रह चुके हैं। तकनीक, विनिर्माण, वित्त, स्वास्थ्य सेवा और सेवा क्षेत्रों में दशकों के अनुभव के आधार पर लेखक उन पैटर्न्स की पहचान करते हैं जो अलग-अलग उद्योगों में बार-बार सामने आते हैं।
सह-लेखक रोशन भोंडेकर एक भारतीय-स्पेनिश उद्यमी हैं, जिन्हें आईटी रणनीति, परामर्श और गवर्नेंस के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने वित्त, विमानन, स्वास्थ्य सेवा, दूरसंचार और ऑटोमोटिव जैसे क्षेत्रों में कार्य किया है।
वहीं, वैभव देशपांडे वर्तमान में पुणे स्थित एआईटी ग्लोबल इंडिया में मुख्य सूचना अधिकारी (सीआईओ) के रूप में कार्यरत हैं। तकनीकी नेतृत्व में उनके पास 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है, जिसमें दूरसंचार, बैंकिंग, फार्मास्यूटिकल्स और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में बड़े डिजिटल परिवर्तन कार्यक्रमों का संचालन शामिल है।
पुस्तक में कॉर्पोरेट राजनीति की निरंतरता को संगठनात्मक पदानुक्रम, सीमित नेतृत्व पदों के लिए प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही की अस्पष्टता जैसे संरचनात्मक कारणों से जोड़ा गया है। लेखक यह भी संकेत देते हैं कि जब नेतृत्व प्रणालियां परिणामों की बजाय दिखावे को पुरस्कृत करती हैं, तो अनजाने में राजनीतिक व्यवहार को बढ़ावा मिलता है, भले ही संगठन औपचारिक रूप से मेरिट आधारित प्रगति का समर्थन करते हों।
राजमंगल पब्लिशर्स, जो परंपरागत रूप से हिंदी साहित्य और सामाजिक विमर्श के लिए जाना जाता है, इस अंग्रेजी भाषा की पुस्तक को समकालीन पेशेवर मुद्दों से जुड़ाव के रूप में देखता है। ऐसे समय में, जब आईटी और सेवा क्षेत्रों में पक्षपात, बर्नआउट और कर्मचारियों के पलायन को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, यह पुस्तक एक उद्योग-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।