नेस्ले गरीब देशों में बेचे जाने वाले शिशु दूध में चीनी की अधिक मात्रा मिलाता है, लेकिन यूरोप या ब्रिटेन के अपने मुख्य बाजारों में नहीं। नेस्ले के दो सबसे ज्यादा बिकने वाले बेबी फूड ब्रांड्स में चीन की अधिक मात्रा पाई गई है। जबकि यही उत्पाद ब्रिटेन, जर्मनी, स्विट्जरलैंड और अन्य विकसित देशों में बगैर चीनी के बेचे जा रहे हैं। पब्लिक आई की एक रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में बिकने वाले नेस्ले के बच्चों से जुड़े उत्पादों की हर सर्विंग में करीब 3 ग्राम चीनी पाई गई। चीनी की इस मात्रा के बारे में पैकेट पर कंपनी की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है। नेस्ले की ओर से गरीब और विकासशील देशों में बेचे जा रहे उत्पादों में चीनी मिलाने का खुलासा तब हुआ जब स्विस जांच संगठन पब्लिक आई और आईबीएफएएन (इंटरनेशनल बेबी फूड एक्शन नेटवर्क) ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में बेचे जाने वाले कंपनी के बेबी फूड उत्पादों के नमूने बेल्जियम की प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजे।
पब्लिक आई की जांच रिपोर्ट से बुधवार को सार्वजनिक किया गया में कहा गया है कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन में नेस्ले द्वारा बेचे गए छह महीने के बच्चों के लिए सेरेलैक गेहूं आधारित अनाज में कोई अतिरिक्त चीनी नहीं मिली, जबकि उसी उत्पाद में इथियोपिया में प्रति सर्विंग 5 ग्राम और थाईलैंड में 6 ग्राम से अधिक चीनी मिली।
रिपोर्ट के अनुसार डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि बच्चों के शुरुआती दिनों में चीनी के संपर्क में आने से उनमें शर्करा आधारित उत्पादों के लिए जीवन भर आकर्षित रहते हैं जिससे मोटापे और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। 2022 में, WHO ने शिशुओं के लिए खाद्य उत्पादों में चीनी मिलाने पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया था और उद्योगों से अपने उत्पादों में सुधार करने को कहा था।
रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने मीडिया से कहा है कि पिछले 5 वर्षों में, नेस्ले इंडिया ने शिशु अनाज पोर्टफोलियो में अतिरिक्त चीनी की मात्रा को 30% तक कम किया है ... "। प्रवक्ता ने कहा, "हम नियमित रूप से अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करते हैं और गुणवत्ता, सुरक्षा और स्वाद से समझौता किए बिना अतिरिक्त चीनी के स्तर को कम करने के लिए अपने उत्पादों में सुधार करना जारी रखते हैं।