व्यापारिक मोर्चे पर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अप्रैल का महीना मिले-जुले रुझानों वाला रहा है। एक तरफ जहां वैश्विक स्तर पर भारत के कुल निर्यात में शानदार दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया के साथ होने वाले व्यापार में एक बड़ी गिरावट देखने को मिली है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल द्वारा साझा किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, कुल निर्यात और आयात दोनों में बढ़ोतरी हुई है, जो घरेलू और बाहरी मांग की गतिशीलता को दर्शाता है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल के महीने में भारत के कुल निर्यात ने मजबूत प्रदर्शन किया है।
कुल व्यापारिक आंकड़ों में जहां सकारात्मकता है, वहीं क्षेत्रीय स्तर पर पश्चिम एशिया के साथ व्यापारिक संबंधों में अप्रैल के दौरान सुस्ती दर्ज की गई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के बयान के अनुसार, पश्चिम एशिया के साथ द्विपक्षीय व्यापार के दोनों पैमानों (आयात और निर्यात) में भारी गिरावट आई है:
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में चीन को भारत का निर्यात 27 प्रतिशत बढ़ गया, जबकि पड़ोसी देश से आयात 20.85 प्रतिशत बढ़ गया। आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 में निर्यात 1.39 बिलियन डॉलर से बढ़कर अप्रैल 2026 में 1.77 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि आयात पिछले वर्ष के इसी महीने के 9.90 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर अप्रैल 2026 में 11.97 बिलियन डॉलर हो गया।
व्यापार घाटा अप्रैल 2025 में 8.51 बिलियन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 10.2 बिलियन डॉलर रहा। चीन ने 2025-26 में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार के रूप में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है, द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि इस अवधि के दौरान बीजिंग के साथ देश का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। अमेरिका 2024-25 तक लगातार चार वर्षों तक भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा।
अप्रैल के व्यापारिक आंकड़े बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने कुल आयात और निर्यात में क्रमशः 10% और 13.78% की वृद्धि के साथ अपनी समग्र व्यापारिक क्षमता को मजबूत बनाए रखा है। हालांकि, पश्चिम एशिया के साथ व्यापार में लगभग 30% के आसपास की यह गिरावट चिंता का विषय हो सकती है। आगामी तिमाहियों में बाजारों और नीति निर्माताओं की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या यह क्षेत्रीय गिरावट एक अस्थायी व्यापारिक रुझान है या फिर इसका असर लंबी अवधि के आंकड़ों पर भी देखने को मिलेगा। सरकार की ओर से आयात-निर्यात के आंकड़ों के जारी करने के पूर्व सरकार ने शुक्रवार से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3% वृद्धि कर दी है। इसके लिए पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण खाड़ी देशों के साथ देश के व्यापार में आए व्यावधान को जिम्मेदार माना जा रहा है।