एसबीआई की अगुवाई वाले कर्जदाता बैंकों के समूह के अलावा कंपनी के पायलट और इंजीनियरों के यूनियन ने भी एनसीएलटी से पक्षकार बनाने की मांग की है। वहीं, नीदरलैंड के दो लॉजिस्टिक वेंडर्स ने बुधवार को जेट एयरवेज के खिलाफ याचिका दाखिल कर इसके आईबीसी समाधान का विरोध किया है। इस पर 20 जून से सुनवाई शुरू होगी।
रेटिंग एजेंसी इक्रा का कहना है दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) के तहत जेट एयरवेज का समाधान होने पर वित्तीय लेनदारों को ज्यादा नुकसान होगा। एजेंसी ने कहा कि आईबीसी में अब तक हुए 92 मामलों के समाधान में परिचालन लेनदारों को कुल कर्ज (81 अरब रुपये) का 42 फीसदी मिला है, जबकि वित्तीय लेनदारों को कुल कर्ज (1,606 अरब रुपये) का 44 फीसदी ही रिकवरी हुई। लिहाजा जेट के मामले में भी वित्तीय लेनदार ज्यादा नुकसान में रहेंगे।
बैंकों के एनसीएलटी पहुंचने के बाद से ही जेट के शेयरों में बड़ी गिरावट जारी है। बुधवार को भी बीएसई पर कंपनी के शेयर 18.17 फीसदी गिरकर 33.10 रुपये के भाव पर आ गए, जबकि एनएसई पर 18.51 फीसदी की गिरावट के साथ 33 रुपये पर पहुंच गए। पिछले 13 कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयर 78 फीसदी तक गिर चुके हैं। अप्रैल 2005 में जेट के शेयर 1,375 रुपये के भाव थे, इसके बाद यह स्तर कभी नहीं छू सके।