राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पिछले साल तमिलनाडु के नागपट्टिनम में तेल रिसाव के मामले में बुधवार को आईओसीएल समूह की कंपनी सीपीसीएल पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।एनजीटी की दक्षिणी जोन की पीठ पुष्पा सत्यनारायण, न्यायिक सदस्य और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. सत्यगोपाल कोरलापति ने कहा, "नुकसान मानव निर्मित हो या प्राकृतिक, पर ऐसे खतरे कच्चे तेल की ढुलाई में आते हैं और इस तरह की घटनाएं बिना किसी गलती के दायित्व लगाने के औचित्य को रेखांकित करती हैं।"
एनजीटी की पीठ ने मीडिया में आई खबरों के आधार पर इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार नागपट्टिनम से कराईकल बंदरगाह तक चेन्नई पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीपीसीएल) कावेरी बेसिन रिफाइनरी (सीबीआर) के कच्चे भंडारण टैंकों से 9 किलोमीटर लंबी 20 इंच व्यास की पाइपलाइन के जरिए रिसाव हुआ था।
एनजीटी ने कहा कि हालांकि उसने भारतीय तटरक्षक बल और सीपीसीएल के रुख पर गौर किया है कि तेल रिसाव के कारण समुद्री जल को बहुत नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन पीठ ने यह पता लगाने के लिए जांच का निर्देश देना उचित समझा कि क्या किसी उपचारात्मक उपाय की आवश्यकता है।
इसलिए, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नागापट्टिनम के जिला मजिस्ट्रेट, भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) और राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र (एनसीएससीएम) की एक संयुक्त समिति का गठन किया गया था।
एनजीटी पीठ ने कहा कि विभिन्न विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर समिति ने कहा कि कच्चे तेल का कोई रिसाव नहीं देखा गया, तटरेखा साफा था और घटना के कारण किसी मछली की मौत की सूचना नहीं मिली।
पीठ ने कहा, "इसलिए हमारा मानना है कि सीपीसीएल को बिना किसी गलती के दायित्व के सिद्धांत के अधीन किया जाना चाहिए और (नागपट्टिनम) जिले के लोगों के पर्यावरण और स्वास्थ्य में सुधार के लिए जुर्माना लगाया जाना चाहिए।"
सीपीसीएल को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए एनजीटी ने उसे दो महीने के भीतर पांच करोड़ रुपये की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया और कहा कि इसे टीएनपीसीबी के पास जमा किया जाना चाहिए।