सरसों तेल के उपभोक्ताओं के लिए एक अच्छी खबर आई है। दरअसल, सरसों के तेल में प्रयोग होने वाले ब्लेंडिंग को लेकर 'भारतीय खाद्य संरक्षा व प्राधिकरण' ने लैटर जारी किया है। इसके बाद देशभर में सरसों के तेल की कीमत कम होने की उम्मीद है।
सरकार ने अक्तूबर में ब्लेंडिंग पर रोक लगा दी थी। सरकार के इस फैसले के बाद से तेल की कीमतों में इजाफा होना शुरू हो गया था। नतीजा यह निकला कि देशभर में सरसों तेल की कीमतें बढ़कर 150 से 190 रुपये प्रति लीटर हो गईं।
सरकार के निर्णय के खिलाफ कुछ कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट में ब्लेंडिंग को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई हुई। इसके बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने सरसों के तेल पर लगी ब्लेंडिंग की रोक को हटा दिया।
क्या होता है ब्लेंडिंग
सरसों के तेल में तय मात्रा में अन्य तेलों का सम्मिश्रण होता, जिसे ब्लेंडिंग कहते हैं। तय मात्रा के मुताबिक, अभी तक तेल कंपनियों को सरसों के तेल में 20 फीसदी तक ब्लेंडिंग करने की अनुमति थी। सरकार ने ब्लेंडिंग की आड़ में मिलावट और शुद्ध सरसों तेल की खपत को बढ़ाने का हवाला देते हुए इस पर रोक लगाई थी।
तेल की कीमतों में हुई इतनी वृद्धि
वर्तमान में एक लीटर पाम ऑयल की कीमत 75 से 110 रुपये हो गई है। बाजार में सनफ्लावर ऑयल 98 से 130 रुपये और सरसों का तेल 110 से 150 रुपये लीटर की कीमत पर बिक रहा है। वहीं, कुछ खास कंपनियों का सरसों का तेल 190 रुपये लीटर भी बिक रहा है।
ब्लेंडिंग मापने की तकनीक नहीं
व्यापारियों का कहना है कि यदि छोटा दुकानदार अगर एक तेल में दूसरा तेल मिलाता है, उसे मिलावट के आरोप में कड़ी सजा दी जाती है। वहीं, सरकार उद्योगपतियों को मिश्रण करने की मंजूरी दे रही है। ब्लेंडिंग के तहत मिलाई गई तेल की मात्रा की जांच की कोई तकनीक भी नहीं है।