भारत आर्थिक विकास और अवसरों में अभूतपूर्व वृद्धि का गवाह बनेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से वर्ष भारत 2047 तक $40 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगी। यह दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगी। ये बातें रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुखिया मुकेश अंबानी ने पंडित दीनदयाल ऊर्जा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान कही है।
मंगलवार को पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी (पीडीईयू) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए मुकेश अंबानी ने कहा कि आने वाले दशकों में भारत के विकास को तीन क्रांतिकारी क्रांतियां नियंत्रित करेंगी इनमें स्वच्छ ऊर्जा क्रांति, जैव-ऊर्जा क्रांति और डिजिटल क्रांति शामिल हैं। भारत के भविष्य के नेताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राष्ट्र वैश्विक स्वच्छ और हरित ऊर्जा क्रांति का नेतृत्व करे। इस मिशन में सफलता प्राप्त करने के लिए 3 मंत्र हैं थिंक बिग...थिंक ग्रीन...और थिंक डिजिटल। अपने वक्तव्य के दौरान मुकेश अंबानी भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर बहुत आशान्वित दिखे।
अंबानी ने टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को समाज और युवाओं के लिए सच्ची प्रेरणा बताया
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने टाटा समूह के अध्यक्ष एन चंद्रशेखरन को व्यवसाय के क्षेत्र में समाज और देश के युवाओं के लिए 'सच्ची प्रेरणा' कहा है। मंगलवार को गांधीनगर में पंडित दीनदयाल एनर्जी यूनिवर्सिटी (पीडीईयू) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए, अंबानी ने टाटा समूह के अध्यक्ष के लिए प्रशंसा की वे चंद्रशेखरन इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे। "वह (चंद्रशेखरन) व्यापार के अवसर और भारत के युवाओं के लिए एक सच्ची प्रेरणा हैं। आरआईएल प्रमुख ने कहा, "दृष्टि दृढ़ विश्वास और समृद्ध व्यावहारिक अनुभव से उन्होंने हाल के वर्षों में भविष्य के लिए टाटा समूह की शानदार वृद्धि की पटकथा लिखी है।
अंबानी ने कहा, "मैं उनके नेतृत्व में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में समूह की ओर से उठाए गए विशाल कदम से विशेष रूप से प्रेरित हूं। यह कदम हमें बेहतर और उज्जवल भविष्य की ओर ले जाने के लिए नई ऊर्जा प्रौद्योगिकियों की क्षमता में उनके विश्वास को दर्शाता है।" अंबानी ने यह भी कहा कि यदि भारत को नवीकरणीय ऊर्जा महाशक्ति बनना है, तो यह राष्ट्रीय गठबंधन के मूल्यों के साथ काम करने वाले कई प्रमुख व्यावसायिक समूहों की संयुक्त इच्छा और पहल के माध्यम से संभव है।