न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की समिति ने सोमवार को अपनी पहली बैठक में ‘MSP को अधिक प्रभावी और पारदर्शी’ बनाने सहित अन्य अनिवार्य विषयों के लिए चार उप-समूह बनाए हैं। बता दें कि इस बैठक के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के प्रतिनिधि अनुपस्थित रहे।
पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल (Sanjay Agrawal) की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी पहली बैठक के दौरान शून्य बजट आधारित खेती को बढ़ावा देने, देश की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फसल पैटर्न को बदलने और एमएसपी को और अधिक प्रभावी व पारदर्शी बनाने के तरीकों पर चर्चा की। गौरतलब है कि एमएसपी समिति में अध्यक्ष सहित 26 सदस्य हैं, जबकि एसकेएम के प्रतिनिधियों के लिए तीन सीटें खाली रखी गईं हैं।
कमिटी के सदस्य बिनोद आनंद ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा है कि एक दिन के विचार-विमर्श के बाद समिति ने तीन अनिवार्य विषयों पर चार उप-समूह या समितियां बनाने का निर्णय लिया है।
किसान समूह सीएनआरआई में महासचिव का प्रभार संभाल रहे आनंद ने कहा कि पहला समूह हिमालयी राज्यों के साथ-साथ वहां फसल पैटर्न और फसल विविधीकरण का अध्ययन करने के साथ-साथ इन राज्यों में एमएसपी समर्थन कैसे सुनिश्चित किया जाए इस पर मंथन करेगा।
दूसरा समूह माइक्रो इरिगेशन पर अध्ययन के लिए बनाया गया है। आईआईएम अहमदाबाद के सुखपाल सिंह की अध्यक्षता में बनाई गई यह कमिटी सूक्ष्म सिंचाई (Micro Irrigation) को किसान केंद्रित बनाने पर अध्ययन करेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सूक्ष्म सिंचाई सरकारी सब्सिडी से संचालित होती हैँ यह समूह बात पर भी चिंतन करेगा कि इसके लिए किसानों के बीच मांग कैसे पैदा की जाए?
तीसरा समूह जीरो बजट आधारित फार्मिंग जबकि चौथा समूह ड्राईलैंड एग्रीकल्चर पर अध्ययन के लिए बनाया गया है।