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MSME For Bharat: वाराणसी है बनारसी साड़ियों व हस्तशिल्प का एमएसएमई हब, कॉन्क्लेव में होगी भविष्य पर चर्चा

Fri, 12 Sep 2025 12:45 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

MSME For Bharat: वाराणसी की एमएसएमई को उसकी बनारसी साड़ियों, कालीन, खिलौने जैसे उत्पादों के लिए जाना जाता है। ये उत्पाद स्थानीय परंपरा और आधुनिक डिजाइनों का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं। ये भारतीय शिल्प कला का विश्व स्तर पर प्रतीक बन चुके हैं। एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव के दौरान इसे और ख्याति दिलाने की योजनाओं पर चर्चा होगी। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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एमएसएमई फॉर भारत - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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वाराणसी में आयोजित MSME फॉर भारत कॉन्क्लेव का आयोजन वाराणसी में जल्द ही होना है। यह कार्यक्रम स्थानीय उद्यमियों, सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विभिन्न व्यापारिक संगठनों को एकत्रित कर वाराणसी के MSME क्षेत्र की संभावनाओं और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा करने का विशेष अवसर प्रदान करेगा।

वाराणसी अपनी विरासत और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए विश्व विख्यात

वाराणसी अपनी ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए विश्व विख्यात है। यह शहर एमएसएमई क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां की प्रमुख उद्योग इकाइयों में बनारसी साड़ी निर्माण, कालीन बुनाई और खिलौने बनाना शामिल हैं। स्थानीय कारीगर और छोटे उद्योग इन पारंपरिक उत्पादों के निर्माण में संलग्न हैं। यहां के उत्पाद देश-विदेश में अपनी अनोखी पहचान बनाए हुए हैं।

एक जिला एक उत्पाद योजना योजना के तहत वाराणसी पर विशेष फोकस

सरकारी सहयोग और आधारभूत संरचना में वाराणसी के लिए ODOP (एक जिला एक उत्पाद) योजना के तहत विशेष फोकस रखा गया है। यह पहल स्थानीय उत्पादन को वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से कार्यरत है। MSME सेक्टर में सक्रिय उद्यमी स्थानीय हस्तशिल्प को न केवल संरक्षित कर रहे हैं, बल्कि उन्हें आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप भी ढाल रहे हैं।

बनारसी साड़ियों, कालीन और खिलानों के लिए वाराणसी जाना-माना नाम

वाराणसी की एमएसएमई को उसकी बनारसी साड़ियों, कालीन, खिलौने जैसे उत्पादों के लिए जाना जाता है। ये उत्पाद स्थानीय परंपरा और आधुनिक डिजाइनों का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं। ये भारतीय शिल्प कला का विश्व स्तर पर प्रतीक बन चुके हैं। लेकिन इस क्षेत्र को कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है। इसमें गिरती कारीगर आय, नकली उत्पादों का बाजार में आना और कमजोर मार्केटिंग स्ट्रैटेजी शामिल हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, स्थानीय उद्यमी निरंतर नवाचार के जरिए अपने उत्पादों को प्रतिस्पर्धात्मक बनाकर वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की कोशिशों में जुटे हैं।

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