भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस महीने हुई मौद्रिक नीति समिति में ब्याज दरों में कटौती के पक्ष में अपना मत दियाा था। बैठक के दौरान उन्होंने मुद्रास्फीति के केंद्रीय बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर बढ़ने का हवाला देते हुए कहा था कि इस समय ब्याज दरों में कटौती एक उचित मौद्रिक नीति प्रतिक्रिया है। शुक्रवार को जारी एमपीसी की बैठक के विवरण में यह जानकारी दी गई है।
मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के पांच अन्य सदस्यों के साथ मिलकर अल्पकालिक उधार दर (रेपो रेट) में 25 आधार अंकों की कटौती करके इसे 6.25 प्रतिशत करने के पक्ष में मतदान किया था। आरबीआई ने 5 से 7 फरवरी तक हुई अपनी बैठक में पांच साल के अंतराल के बाद ब्याज दरों में कटौती की। आरबीआई की मिनट्स के अनुसार, मल्होत्रा ने कहा, "वृहद आर्थिक परिदृश्य को देखते हुए, जब मुद्रास्फीति के लक्ष्य के अनुरूप रहने की उम्मीद है, और यह मानते हुए कि मौद्रिक नीति दूरदर्शी है, मैं वर्तमान स्थिति में कम नीति दर को अधिक उपयुक्त मानता हूं।"
मल्होत्रा ने कहा, "उभरते वृहद आर्थिक परिवेश के अनुरूप प्रतिक्रिया करने में लचीलापन मिलेगा। इस तार्किक मार्ग को अपनाने से मौद्रिक नीति अपना दायित्व पूरा करने में सक्षम होगी और भारतीय अर्थव्यवस्था के सतत विकास में अपनी भूमिका निभा सकेगी।" अक्तूबर में आरबीआई की ओर से महंगाई दर लक्ष्य सीमा के ऊपर जाने के बाद, बीते महीनों में मुख्य मुद्रास्फीति में कमी आई और जनवरी में यह पांच महीने के निम्नतम स्तर 4.3 प्रतिशत पर पहुंच गई।
एमपीसी के सदस्य और आरबीआई के डिप्टी गवर्नर एम राजेश्वर राव ने बैठक के दौरान कहा कि वर्तमान समय में, मुख्य मुद्रास्फीति के 4 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर बढ़ने के साथ, नीतिगत रेपो दर में कटौती के जरिए विकास से संबंधित चिंताओं को दूर करने की अधिक गुंजाइश है।
एमपीसी के बाहरी सदस्यों- नागेश कुमार, सौगत भट्टाचार्य और राम सिंह- ने भी रेपो दर में कटौती के पक्ष में मतदान किया था। नागेश कुमार ने चिंता जताई थी कि चीन में अतिरिक्त क्षमता की डंपिंग हो सकती है, जिससे उनकी भारी जेबों और पश्चिमी बाजारों तक उनकी पहुंच पर संकट आ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस्पात सहित कुछ विनिर्माण क्षेत्रों पर दबाव महसूस होने लगा है (संभवतः यही नकारात्मक वृद्धि का कारण है), जबकि वस्त्र और चमड़े के सामान जैसे श्रम-प्रधान उपभोक्ता क्षेत्रों पर भी दबाव बढ़ रहा है। नवीनतम आर्थिक सर्वेक्षण से पता चलता है कि एफडीआई प्रवाह धीमा रहा है, एफडीआई और एफपीआई दोनों विदेशी निवेशक वापस लौट रहे हैं, जिससे शुद्ध रूप से बहुत कम निवेश बचा है।
कुमार ने कहा, "इसलिए, विकास को समर्थन देने की बात पर अधिक जोर नहीं दिया जा सकता।" एमपीसी के बाहरी सदस्य सौगत भट्टाचार्य ने कहा कि मुद्रास्फीति में गिरावट को देखते हुए, ब्याज दरों में कटौती "आर्थिक चक्र के इस बिंदु पर उचित नीतिगत प्रतिक्रिया" है। भट्टाचार्य ने तटस्थ मौद्रिक नीति रुख जारी रखने के लिए भी मतदान किया। राम सिंह ने कहा कि केंद्रीय बजट 2025 ने मांग को बढ़ावा दिया है। सिंह ने कहा, "हालांकि, जब तक ब्याज दरों में तत्काल कमी नहीं की जाती, मांग बढ़ने से निजी पूंजीगत व्यय में वृद्धि नहीं होगी।" एमपीसी की अगली बैठक 7 से 9 अप्रैल, 2025 के दौरान निर्धारित है।