आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई। ब्याज दरों पर फैसला 4 जून यानी शुक्रवार को आने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी की दूसरी लहर के कारण अर्थव्यवस्था में आई अनिश्चितता को देखते हुए नीतिगत दरों में बदलाव की संभावना नहीं है। अप्रैल में हुई बैठक में भी इन दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था।
पीडब्ल्यूसी इंडिया लीडर (इकनॉमी एडवाइजरी सर्विसेज) के रनेन बनर्जी का कहना है कि पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों और कच्चे माल की लागत में वृद्धि के कारण महंगाई का खतरा बना हुआ है। ऐसे में आरबीआई अपने उदार मौद्रिक रुख को जारी रखते हुए रेपो दर को 4 फीसदी पर बनाए रखेगा।
वहीं, इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि दूसरी लहर के कारण अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल है। देश में जब तक टीकाकरण की स्थिति संतोषजनक स्तर पर नहीं पहुंच जाती, तब तक 2021 में नीतिगत दरों में बदलाव की संभावना नहीं है।
इंडियन बैंक की सीईओ-एमडी पद्मजा चुंदूरू का कहना है कि लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था पूरी तरह खुली नहीं है। टीकाकरण पर भी अनिश्चितता बनी है। ऐसे में ब्याज दर यथावत रहने का अनुमान है।