दुनियाभर में ऑटोमेशन (स्वचालन) के बढ़ते चलन के कारण आने वाले वर्षों में करोड़ों नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी। इसका सबसे अधिक महिला कर्मचारियों पर पड़ेगा। मैकेंजी की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑटोमेशन के कारण अगले एक दशक में दुनियाभर की करीब 16 करोड़ (एक चौथाई) महिला कर्मचारियों को अपनी नौकरियां (व्यवसाय) बदलनी होंगी। वहीं, भारत में करीब 1.1 करोड़ (8 फीसदी से अधिक) महिलाओं के वर्ष 2030 तक ऐसा करने की जरूरत पड़ेगा।
मैकेंजी की ‘द फ्यूचर ऑफ वूमेन एट वर्क : ट्रांजिशन इन द एज ऑफ ऑटोमेशन’ रिपोर्ट में कहा गया है कि विनिर्माण से संबंधित व्यवसायों में ऑटोमेशन की कम जरूरतों के बावजूद महिलाओं पर नौकरी जाने का खतरा पुरुषों के मुकाबले कम नहीं रहेगा। औसतन करीब 10.7 करोड़ (20 फीसदी) महिलाओं और 16.3 करोड़ (21 फीसदी) पुरुषों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ सकती है।
भारतीय परिदृश्य में करीब 10 फीसदी महिलाओं की नौकरी पर संकट है। कम वेतन और ऑटोमेशन के कम प्रभाव के कारण यह आंकड़ा वैश्विक औसत से कम है। मैकेंजी ग्लोबल इंस्टीट्यू़ट की पार्टनर अनु मडगावकर का कहना है कि कार्यस्थल पर पारंपरिक बाधाओं का सामना कर रही महिलाओं के लिए खुद को ऑटोमेशन के अनुकूल बनाना या व्यवसाय बदलना काफी चुनौतीपूर्ण होगा।
कौशल में बदलाव जरूरी
मैकेंजी ने यह रिसर्च छह विकसित अर्थव्यवस्ताओं कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, यूके और अमेरिका के साथ चार विकासशील अर्थव्यवस्थाओं भारत, चीन, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका पर की है। इन 10 देशों में विश्व की 50 फीसदी जनसंख्या रहती है और वैश्विक जीडीपी का 60 फीसदी इन्हीं देशों से आता है।
अध्ययन में कहा गया है कि ऑटोमेशन के कारण लाखों महिलाओं की नौकरी चली जाएगी और जो काम में बने रहना चाहती है, उन्हें अपने कौशल में बड़े बदलाव करने की जरूरत होगी।