इस वित्तीय वर्ष में भारत की जीडीपी 7.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि 2019-20 में भारत की जीडीपी 7.4 फीसदी रहने की संभावना है।
बैंकों के हालत रहेंगे स्थिर
एजेंसी ने कहा है कि भारतीय बैंकों का आकलन स्थिर रहेगा। इस दौरान बैंक अपने एनपीए को भी कम कर पाएंगे। सरकार की तरफ से बैंकों को राहत मिलने से भी ऐसा देखने को मिलेगा।
क्या होती है जीडीपी
जीडीपी को हम आम बोलचाल की भाषा में सकल घरेलू उत्पाद के नाम से जानते हैं। यह एक तरह से किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को नापने का बैरोमीटर होता है। देश की अर्थव्यवस्था किस हाल में है और आगे के वर्ष में इसकी कैसी गति रहेगी, इस बात का पता चलता है।
भारत में जीडीपी की गणना प्रत्येक तिमाही में की जाती है। जीडीपी का आंकड़ा अर्थव्यवस्था के प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में उत्पादन की वृद्धि दर पर आधारित होता है। जीडीपी के तहत कृषि, उद्योग व सेवा तीन प्रमुख घटक आते हैं। इन क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ने या घटने के औसत के आधार पर जीडीपी दर तय होती है।
1935 में हुआ पहली बार इस्तेमाल
जीडीपी को सबसे पहले अमेरिका के एक अर्थशास्त्री साइमन ने 1935-44 के दौरान इस्तेमाल किया था। इस शब्द को साइमन ने अमेरिका की कांग्रेस में परिभाषित करके दिखाया तो उसके बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इस शब्द को इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।
दो तरह से प्रस्तुत होता है जीडीपी
जीडीपी को दो तरह से प्रस्तुत किया जाता है, क्योंकि उत्पादन की कीमतें महंगाई के साथ घटती बढ़ती रहती हैं। यह पैमाना है कॉस्टैंट प्राइस का जिसके अंतर्गत जीडीपी की दर व उत्पादन का मूल्य एक आधार वर्ष में उत्पादन की कीमत पर तय होता है जबकि दूसरा पैमाना करेंट प्राइस है जिसमें उत्पादन वर्ष की महंगाई दर शामिल होती है।