मोदी सरकार के 10 साल के कार्यकाल में रोजगार में 36 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में 17.18 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है। केंद्रीय श्रम मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने बृहस्पतिवार को कहा, संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल के दौरान 2014-15 तक 47.15 करोड़ लोगों को रोजगार मिला था। उसके बाद से 10 साल में यह संख्या 36 फीसदी बढ़कर 64.33 करोड़ पहुंच गई। इस तरह, रोजगार के कुल 17.18 करोड़ अवसर बढ़े हैं।
मांडविया ने कहा, 10 साल के आंकड़े राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार में रोजगार सृजन में सुधार को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, यूपीए सरकार में 2004 से 2014 के बीच रोजगार वृद्धि सात फीसदी रही थी। तब सिर्फ 2.9 करोड़ अतिरिक्त नौकरियां सृजित हुईं, जबकि मोदी सरकार में 2014-24 के बीच 17.19 करोड़ नौकरियां जोड़ी गईं। वहीं, पिछले एक साल (2023-24) में देश में करीब 4.6 करोड़ नौकरियां सृजित हुई हैं।
बेरोजगारी दर घटकर 3.2 फीसदी
2023-24 में बेरोजगारी दर घटकर 3.2 फीसदी रह गई, जो 2017-18 में 6 फीसदी थी। कामकाजी आबादी अनुपात बढ़कर 2023-24 में 58.2 फीसदी पहुंच गया, जो 2017-18 में 46.8 फीसदी था। श्रम बल भागीदारी दर बढ़कर 2023-24 में 60.1 फीसदी हो गई, जो 2017-18 में 49.8 फीसदी थी।
कृषि क्षेत्र : यूपीए के समय 16 फीसदी गिरा रोजगार
मांडविया ने कृषि क्षेत्र के बारे में कहा कि यूपीए कार्यकाल के दौरान 2004 से 2014 के बीच रोजगार में 16 फीसदी की गिरावट आई, जबकि राजग कार्यकाल के तहत 2014 से 2023 के बीच इसमें 19 फीसदी की वृद्धि हुई है। इसी तरह, यूपीए कार्यकाल में विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सिर्फ छह फीसदी बढ़ा, जबकि राजग कार्यकाल में इसमें 15 फीसदी की वृद्धि हुई।
सात साल में 4.7 करोड़ युवा ईपीएफओ से जुड़े
मांडविया ने संगठित क्षेत्र में नौकरी में शामिल होने वाले युवाओं की संख्या में वृद्धि के बारे में कहा कि पिछले सात साल में (सितंबर, 2017-सितंबर, 2024 के बीच) 4.7 करोड़ से अधिक युवा (आयु 18-28 वर्ष) कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से जुड़े।
संगठित क्षेत्र में नियुक्तियां 9 फीसदी बढ़ीं
उच्च कौशल व रणनीतिक भूमिकाओं के कारण दिसंबर में संगठित क्षेत्र की नियुक्ति गतिविधियां एक साल पहले की तुलना में 9 फीसदी बढ़ गई हैं। नौकरी जॉबस्पीक के अनुसार, दिसंबर 2024 में सूचकांक 2,651 अंक तक पहुंच गया, जो आगे के लिए आशाजनक संकेत है।
रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर में प्राथमिक विकास को चलाने वाले जो प्रमुख क्षेत्र थे, उनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग (36 फीसदी), तेल व गैस (फीसदी), एफएमसीजी (12 फीसदी) और हेल्थकेयर (12 फीसदी) शामिल हैं। वर्ष के अंत तक शीर्ष मेट्रो शहरों ने 10 फीसदी वृद्धि दर्ज की। 2024 में फ्रेशर्स की भर्ती कम होकर 6 फीसदी रह गई। फ्रेशर्स की भर्ती मुख्य रूप से डिजाइन (39 फीसदी), ब्यूटी एंड वेलनेस (26 फीसदी) और खुदरा क्षेत्रों में अधिक रही थी। एफएमसीजी में फ्रेशर्स की भर्तियों में 18 फीसदी की तेजी रही जो पूरे वर्ष में सबसे अधिक मासिक वृद्धि दर्ज की। ब्यूरो
चेन्नई-बंगलूरू शीर्ष पर
रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई (35 फीसदी) और बंगलूरू (21 प्रतिशत) की वृद्धि के साथ शीर्ष पर रहे। कोयंबटूर में नियुक्तियों में 14 प्रतिशत और विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नियुक्ति में 52 फीसदी वृद्धि रही। हैदराबाद ने भी 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की।