विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि प्याज निर्यात पर रोक लगाने से पहले जो निर्यात खेप सीमा शुल्क विभाग के हवाले कर दी गई थी उसे निर्यात के लिए जारी किया जा सकता है। एमईए के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि मंत्रालय इस बात से अवगत है कि पड़ोस के कई देश भारत से बड़ी मात्रा में प्याज आयात करते हैं।
विचार-विमर्श कर रही है सरकार
उन्होंने कहा, 'हम सरकार में अन्य पक्षों के साथ इस बारे में विचार-विमर्श कर रहे हैं। मैं समझता हूं कि यह निर्णय किया गया है कि जो निर्यात खेप निर्यात रोक लगने से पहले सीमा शुल्क विभाग को सौंपी जा चुकी थी, उसे निर्यात के लिए जारी किया जा सकता है।'
उनसे यह पूछा गया था कि क्या नेपाल ने प्याज निर्यात पर रोक के संदर्भ में भारत से आग्रह किया है। इस पर प्रवक्ता ने कहा कि, 'इस संदर्भ में हमारे कुछ पड़ोसी देशों में गतिविधियां देखी गई हैं। हम लगातार स्थिति पर नजर रखेंगे।'
14 सितंबर को लगा था निर्यात पर रोक
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 14 सितंबर को प्याज की सभी किस्मों के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। सरकार की इस पहल का मकसद घरेलू बाजारों में इस जरूरी जिंस की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों को काबू में करना था। भारत-नेपाल सीमा मुद्दे पर पूछे गए एक सवाल पर श्रीवास्तव ने कहा कि वह इस बारे में भारत की स्थिति कई बार स्पष्ट कर चुके हैं, उन्हें इस बारे में कुछ और नहीं कहना।
अप्रैल से जून में इतना किया गया निर्यात
बता दें कि दक्षिण भारत के राज्यों में भारी बारिश के चलते इस बार प्याज की फसल को खासा नुकसान हुआ है। इसके चलते घरेलू बाजार में प्याज की कीमतें काफी बढ़ी हैं। भारत ने अप्रैल से जून के बीच करीब 19.8 करोड़ डॉलर के प्याज का निर्यात किया है। पिछले साल 44 करोड़ डॉलर के प्याज का निर्यात किया गया था। भारत से सबसे ज्यादा प्याज का निर्यात श्रीलंका, बांग्लादेश, मलयेशिया और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को होता है।
पिछले साल भी लगाया था प्रतिबंध
इससे पहले सरकार ने सितंबर 2019 में भी प्याज के निर्यात पर रोक लगाई थी। उस समय मांग और आपूर्ति में बहुत ज्यादा अंतर आ जाने की वजह से प्याज की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। महाराष्ट्र जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में बारिश और बाढ़ के चलते प्याज की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था।