कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
जब ऊर्जा का नल सूखता है, तो महंगाई का मीटर सबसे तेजी से भागता है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा और रिफाइनरियों के बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में एक ही दिन में 13% का भयंकर उछाल आया और यह 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। कतर की गैस सप्लाई रुकने का सबसे बड़ा खामियाजा एशिया को उठाना पड़ेगा, क्योंकि कतर वैश्विक गैस आपूर्ति का 20% संभालता है और कतर एनर्जी के 82% ग्राहक एशियाई देश ही हैं।
आगे क्या होगा? क्या यह संकट एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है?
यह सिर्फ एक ट्रेलर हो सकता है, क्योंकि असली भू-राजनीतिक तूफान अभी बाकी है! 'वेरिस्क मैपलक्रॉफ्ट' के प्रमुख मिडिल ईस्ट विश्लेषक टोरब्योर्न सोल्टवेड्ट के अनुसार, सऊदी रिफाइनरी पर हमला एक बड़ा 'एस्केलेशन' (तनाव बढ़ना) है। उनका मानना है कि इस हमले के बाद सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियानों में शामिल होने के करीब आ सकते हैं।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला अब पूरी तरह से घेराबंदी में है। सऊदी की रास तनूरा रिफाइनरी पर यह हमला (जिस पर पहले 2021 में भी हूतियों ने हमला किया था) और कतर का गैस उत्पादन रोकना इस बात का साफ संकेत है कि ऊर्जा बाजार एक बड़े झटके के मुहाने पर खड़ा है। आगे चलकर यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही पूरी तरह ठप रहती है, तो दुनिया को एक भयंकर ऊर्जा संकट और महंगाई की नई लहर का सामना करना पड़ सकता है।