ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार के मोर्चे पर एक बड़ा ढांचागत बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार आगामी 1 जुलाई, 2026 से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को पूरी तरह से निरस्त कर उसकी जगह नया 'विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी 'VB-G RAM G' एक्ट लागू करने के लिए तैयार है। यह नई योजना न केवल रोजगार के दिन बढ़ाएगी, बल्कि सिस्टम की खामियों को दूर कर ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को अधिक पारदर्शी और आधुनिक भी बनाएगी।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने हाल ही में संसदीय समिति को जानकारी दी है कि इस नई व्यवस्था के लिए 25 राज्यों ने पहले ही अपने हिस्से का फंड आवंटित कर दिया है। इस पूरी योजना का कुल अनुमानित वार्षिक बजट 1,51,282 करोड़ रुपये तय किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार अपनी तरफ से 95,692.31 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी वहन करेगी। इस योजना को अब 'केंद्रीय क्षेत्र की योजना' से बदलकर 'केंद्र प्रायोजित ढांचे' में तब्दील कर दिया गया है, ताकि ग्रामीण परिसंपत्ति निर्माण में राज्यों की जिम्मेदारी भी तय हो सके।
इस नए कानून के तहत ग्रामीण विकास को चार मुख्य श्रेणियों में लक्षित किया गया है- जल सुरक्षा परियोजनाएं, प्रमुख ग्रामीण आधारभूत ढांचा (कोर इंफ्रास्ट्रक्चर), आजीविका से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर और चरम मौसम से बचाव के कार्य। अब सभी कार्य 'विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं' के आधार पर तय होंगे, जो ग्राम पंचायतों द्वारा तैयार किए जाएंगे और जिन्हें सीधे ग्राम सभाओं से मंजूरी मिलेगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि ग्रामीण विकास पूरी तरह से जरूरत-आधारित हो।