सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी मेटा की पूर्व मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) शेरिल सैंडबर्ग को कैंब्रिज एनालिटिका गोपनीयता मामले से जुड़े ईमेल डिलीट करने के लिए अदालत द्वारा दंडित किया गया है। गौरतलब है कि शेरिल सैंडबर्ग को उन ईमेल्स को सुरक्षित रखने के लिए कहा गया था। डेलावेयर की अदालत के जज वाइस चांसलर ट्रैविस लास्टर ने कहा कि सबूतों से पता चलता है कि सैंडबर्ग ने फर्जी नाम से एक व्यक्तिगत ईमेल खाता बनाया और उनमें से कुछ ईमेल्स को पहले ही हटा दिया, जो संभवतः मामले के हितधारकों से जुड़े थे।
प्रतिबंध के चलते शेरिल सैंडबर्ग की बढ़ी परेशानी
प्रतिबंध के चलते अब शेरिल सैंडबर्ग के सामने अपना पक्ष रखना और अप्रैल में होने वाले आठ दिवसीय, गैर-जूरी परीक्षण में देयता से बचना मुश्किल हो जाएगा। जज ने शेरिल को शेयरधारकों द्वारा किए गए प्रतिबंध प्रस्ताव से संबंधित खर्चों का भुगतान करने का भी आदेश दिया। हालांकि सैंडबर्ग ने अपने जीमेल खाते से कुछ ईमेल्स पहले ही हटा दिए हैं, इसलिए आशंका है कि मामले से जुड़ी अहम और संवेदनशील जानकारी पहले ही खत्म हो चुकी है। अदालत द्वारा शेरिल पर प्रतिबंध लगाने पर अभी तक मेटा या सैंडबर्ग की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
क्या है मामला
यह मामला साल 2018 का है, जब फेसबुक पर लाखों उपयोगकर्ताओं के डेटा को कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा एक्सेस करने की अनुमति देने का आरोप लगा था। कैंब्रिज एनालिटिका एक राजनीतिक परामर्श फर्म है, जिसने साल 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए डोनाल्ड ट्रम्प के प्रचार अभियान का काम किया था। कंपनी के निदेशकों और अधिकारियों पर उपयोगकर्ताओं के इस्तेमाल और संघीय व्यापार आयोग के साथ साल 2012 के सहमति आदेश का उल्लंघन करके निवेशकों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे थे।
हितधारकों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनी के बोर्ड ने साल 2019 में संघीय व्यापार आयोग को 5 अरब डॉलर का बड़ा जुर्माना देने के लिए सौदेबाजी की ताकि मेटा संस्थापक मार्क जुकरबर्ग की व्यक्तिगत जवाबदेही न हो। कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, मुकदमे की शुरुआत से पहले जुकरबर्ग के दूसरी बार पेश होने की उम्मीद है। हितधारकों ने जज लॉस्टर से जेफरी जिएंट्स को दंडित करने के लिए भी कहा, जो पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के चीफ ऑफ स्टाफ थे और जिन्होंने मेटा के बोर्ड में रहते हुए व्यक्तिगत ईमेल का इस्तेमाल किया और उन्हें डिलीट भी किया। हालांकि जज ने कहा कि जिएंट्स कैम्ब्रिज एनालिटिका मामले के बाद मेटा बोर्ड में शामिल हुए थे और कंपनी के अधिकारी नहीं थे।