कर चोरी रोकने के लिए लिया जा सकता है ये निर्णय
इसके साथ ही वित्त मंत्रालय कंपनी से कंपनी के बीच खरीद-फरोख्त (बिजनेस टू बिजनेस) के लिए केंद्रीकृत सरकारी पोर्टल पर ई-इनवॉइस (e-invoice) क्रिएट करने की प्रस्तावित व्यवस्था पर भी विचार कर सकता है।
इसका लक्ष्य जीएसटी की चोरी को रोकना है। इसके साथ ही इससे इनवॉइस का दुरुपयोग भी रुकेगा। बता दें कि ये प्रस्ताव 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक के कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए पास हो सकता है। इसका निर्णय राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ परामर्श कर ही लिया जाएगा।
इस संदर्भ में एक अधिकारी ने बताया कि, 'जीएसटी काउंसिल के सहमत होने पर बिजनेस टू बिजनेस बिक्री के लिए ई-इनवॉइस सृजित करने को लेकर इकाइयों के लिये कारोबार सीमा 50 करोड़ रुपये तय की जा सकती है। इस सीमा के साथ बड़े करदाता जिनके पास अपने साफ्टवेयर को एकीकृत करने की बेहतर प्रौद्योगिकी है, उन्हें बिजनेस टू बिजनेस बिक्री के लिये ई-इनवॉइस सृजित करना होगा।
इससे 50 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाली इकाइयों को रिटर्न फाइल करने और इनवॉइस अपलोड करने के दो काम से राहत मिलेगी। मंत्रालय ई-इनवॉइस प्रणाली सितंबर से शुरू करने की योजना बना रहा है।
लॉटरी पर लगने वाले GST पर भी हो सकता है फैसला
इसके साथ ही लॉटरी पर लगने वाले जीएसटी पर भी फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल राज्य संचालित लॉटरी पर 12 फीसदी और राज्य अधिकृत लॉटरी पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है। लेकिन लोगों की मांग है कि सभी लॉटरी पर एक समान जीएसटी लगाई जाए क्योंकि इससे उन्हें नुकसान हो रहा है।