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21 जून को GST काउंसिल की बैठक, सस्ते हो सकते हैं ये उत्पाद

Wed, 19 Jun 2019 03:55 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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21 जून को मोदी-2.0 सरकार के दूसरे कार्यकाल में जीएसटी (GST) काउंसिल की पहली बैठक है। इस बैठक में आम लोगों के लिए कई फैसले लिए जा सकते हैं। मोटर वाहनों पर जीएसटी दर 28 फीसदी से कम करने के साथ ही GST स्लैब को घटाने पर भी फैसला लिया जा सकता है। 

मोटर वाहन उद्योग को मिल सकती है जीएसटी में छूट

सुस्ती से जूझ रहे मोटर वाहन उद्योग को बजट से पहले जीएसटी परिषद बड़ी सौगात दे सकती है। परिषद की अगामी बैठक में मोटर वाहनों पर जीएसटी दर 28 फीसदी से कम हो सकती है। वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मोटर वाहन क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने जीएसटी परिषद के साथ-साथ राजस्व विभाग से दरों में कटौती का अनुरोध किया है। इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में पहली बार होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में यह प्रस्ताव शामिल हो सकता है।

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उनका कहना है कि पिछले साल यदि त्योहारी मौसम का महीना अक्तूबर छोड़ दिया जाए तो बीते 11 महीने से वाहन बिक्री में सुस्ती नजर आई है। इसलिए सरकार कर में छूट के जरिये उद्योग को सहयोग करे। वाहन कंपनियों के संगठन सियाम के उप महानिदेशक सुगातो सेन का कहना है कि सभी श्रेणियों में बिक्री घटी ही है। उद्योग की मदद के लिए मोटर वाहनों पर कर की दर 28 फीसदी के बजाय 18 फीसदी या उससे कम का स्लैब बनाया जाए। 

तेल वाली गाड़ियों को छूट नहीं

परिवहन क्षेत्र के विशेषज्ञ और इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग (आईएफटीआरटी) के सीनियर फेलो एसपी सिंह ने जीएसटी परिषद से कहा है कि दरों में छूट सीएनजी, एलपीजी या एलएनजी से चलने वाले और हाईब्रिड वाहनों पर ही मिले। पेट्रोल और डीजल से चलने वाले मोटर वाहनों को छूट का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। यह एक तरह से सब्सिडी जैसा होगा।

GST स्लैब घटाने की तैयारी तेज

मौजूदा समय में पांच, 12, 18 और 28 फीसदी के आधार पर अलग अलग वस्तुओं पर जीएसटी लगता है। अब अगली मीटिंग में इन दरों के बदलाव पर फैसला लिया जा सकता है। दरअसल भारत सरकार जीएसटी की ज्यादा स्लैब नहीं चाहती है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी कई बार स्लैब कम करने की बात कही है।

12 और 18 फीसदी के बीच आ सकती है नई दर 

सरकार की अगली प्राथमिकता 12 फीसदी और 18 फीसदी की दो मानक दरों का विलय कर एक दर बनाने की है और इस पर जल्द फैसला लिया जा सकता है। 

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कर चोरी रोकने के लिए लिया जा सकता है ये निर्णय

इसके साथ ही वित्त मंत्रालय कंपनी से कंपनी के बीच खरीद-फरोख्त (बिजनेस टू बिजनेस) के लिए केंद्रीकृत सरकारी पोर्टल पर ई-इनवॉइस (e-invoice) क्रिएट करने की प्रस्तावित व्यवस्था पर भी विचार कर सकता है।

इसका लक्ष्य जीएसटी की चोरी को रोकना है। इसके साथ ही इससे इनवॉइस का दुरुपयोग भी रुकेगा। बता दें कि ये प्रस्ताव 50 करोड़ रुपये या उससे अधिक के कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए पास हो सकता है। इसका निर्णय राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ परामर्श कर ही लिया जाएगा। 

इस संदर्भ में एक अधिकारी ने बताया कि, 'जीएसटी काउंसिल के सहमत होने पर बिजनेस टू बिजनेस बिक्री के लिए ई-इनवॉइस सृजित करने को लेकर इकाइयों के लिये कारोबार सीमा 50 करोड़ रुपये तय की जा सकती है। इस सीमा के साथ बड़े करदाता जिनके पास अपने साफ्टवेयर को एकीकृत करने की बेहतर प्रौद्योगिकी है, उन्हें बिजनेस टू बिजनेस बिक्री के लिये ई-इनवॉइस सृजित करना होगा।

इससे 50 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाली इकाइयों को रिटर्न फाइल करने और इनवॉइस अपलोड करने के दो काम से राहत मिलेगी। मंत्रालय ई-इनवॉइस प्रणाली सितंबर से शुरू करने की योजना बना रहा है।

लॉटरी पर लगने वाले GST पर भी हो सकता है फैसला 

इसके साथ ही लॉटरी पर लगने वाले जीएसटी पर भी फैसला लिया जा सकता है। फिलहाल राज्य संचालित लॉटरी पर 12 फीसदी और राज्य अधिकृत लॉटरी पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है। लेकिन लोगों की मांग है कि सभी लॉटरी पर एक समान जीएसटी लगाई जाए क्योंकि इससे उन्हें नुकसान हो रहा है। 
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