डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली यूपीआई प्रणाली से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले पर सरकार ने स्पष्टीकरण दिया है। 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4 फीसदी का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू किया गया है। सरकार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि यह शुल्क उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि बैंक व्यापारियों पर नजर रखेंगे ताकि एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) का बोझ उपभोक्ताओं पर न पड़े। इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) एक तंत्र बनाएगा और यह सुनिश्चित करेगा कि यूपीआई पर एमडीआर का बोझ उपभोक्ताओं पर न पड़े।
वित्त मंत्रालय यूपीआई मुद्दे पर आईबीए (इंडियन बैंक्स एसोसिएशन) के साथ बैठक करेगा। वित्त मंत्रालय एमडीआर मुद्दे पर व्यापारियों और सीएआईटी (अखिल भारतीय व्यापारी संघ) के साथ भी बैठक करेगा।
आईबीए उपभोक्ताओं में जागरूकता फैलाने के लिए हर क्षेत्रीय भाषा में एक व्याख्यात्मक अभियान शुरू करेगी। जीएसटी परिषद द्वारा एमडीआर पर जीएसटी के संबंध में अपना मत प्रस्तुत करने की संभावना है।
सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार यह कदम यूपीआई परिवेश को मजबूत करने और उसके रखरखाव के लिए उठाया गया है। बैंकों को इस संबंध में फैली गलतफहमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों ने साफ किया कि एमडीआर से मिलने वाला एक भी पैसा सरकार के पास नहीं जाएगा। यह शुल्क सीधे यूपीआई परिवेश के हितधारकों के साथ साझा किया जाएगा। इसमें वे बैंक भी शामिल होंगे जो यूपीआई सेवाओं को संचालित करते हैं।
यह व्यवस्था डिजिटल भुगतान को और अधिक सुलभ बनाने में मदद करेगी। इसका उद्देश्य यूपीआई प्रणाली के संचालन लागत को कवर करना है। सरकार चाहती है कि डिजिटल लेनदेन बिना किसी बाधा के जारी रहे।
क्या उपभोक्ताओं पर पड़ेगा एमडीआर का बोझ?
सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर लगने वाला 0.4 फीसदी एमडीआर शुल्क उपभोक्ताओं से नहीं वसूला जाएगा। यह शुल्क केवल उन व्यापारियों पर लागू होगा जो यूपीआई के माध्यम से बड़ी राशि का भुगतान स्वीकार करते हैं। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे इस संबंध में उपभोक्ताओं और व्यापारियों के बीच फैली गलतफहमियों को दूर करें। इसका मतलब है कि आम लोगों के लिए यूपीआई लेनदेन पहले की तरह ही मुफ्त रहेगा।
एमडीआर का पैसा किसे मिलेगा?
एमडीआर शुल्क से मिलने वाला पैसा सरकार के खजाने में नहीं जाएगा। सूत्रों के अनुसार, यह राशि यूपीाआई इकोसिस्टम परिवेश के विभिन्न भागीदारों के बीच साझा की जाएगी। इसमें वे बैंक शामिल हैं जो लेनदेन को संसाधित करते हैं और यूपीआई बुनियादी ढांचे को बनाए रखते हैं। यह शुल्क यूपीआई प्रणाली के विकास और उसके सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने में मदद करेगा। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है।