सरकार जल्द ही प्रत्यक्ष कर कानूनों में व्यापक बदलाव करने जा रही है। इसके तहत मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (मैट) और लाभांश वितरण कर (डीडीटी) खत्म किए जाने की संभावना है। सीबीडीटी सदस्य अखिलेश रंजन की अध्यक्षता वाली प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) पर बनी समिति की रिपोर्ट में ऐसी कई सिफारिशें की गई हैं। समिति ने सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। डीटीसी, मौजूदा आयकर कानून की जगह लेगा। सरकार उद्योग जगत को राहत देने के लिए इन सिफारिशों पर ही जल्द फैसला कर सकती है।
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि अखिलेश रंजन की अध्यक्षता वाले कार्यबल ने रिपोर्ट दे दी है। विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट में मिनिमम अल्टरनेट टैक्स (मैट) और डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) को हटाने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा कमाई पर दोहरे कर का बोझ भी खत्म करने की सिफारिश की गई है। सरकार ने इससे पहले अप्रत्यक्ष कर के तहत जीएसटी में सुधार किया था। अब बारी प्रत्यक्ष कर की है।
दरअसल, उद्योग जगत काफी दिनों से मैट और डीडीटी को हटाने की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि जब किसी उद्योग को कुछ समय के लिए करावकास का लाभ दिया जाता है तो ऐसे में उनसे मिनिमम अल्टरनेट टैक्स वसूलना एक तरह से उद्योग जगत पर बोझ बढ़ाना है। इसलिए इसे खत्म करने में ही भलाई है।
अभी कंपनियों के मुनाफे पर उद्योगपतियों को 18.5 फीसदी का मैट चुकाना पड़ता है। साथ ही भारतीय कंपनियों को अपने अंशधारकों को लाभांश का भुगतान करने से पहले 15 फीसदी की दर से डीडीटी देना पड़ता है। यह कर कंपनी चुकाती है, जबकि शेयरधारकों को किसी भी वित्त वर्ष में 10 लाख रुपये तक के लाभांश पर कोई कर नहीं देना पड़ता है।