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Mastercard Row: डेटा लीक से जुड़ी चिंताओं के बीच मास्टरकार्ड ग्राहक परेशान, बैंकों से नहीं मिल पा रहा ठोस जवाब

Wed, 06 Aug 2025 06:27 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई/नई दिल्ली

सार

बीते कुछ समय से मास्टरकार्ड के डेबिट और क्रेडिट कार्ड से जुड़े ग्राहक परिचालन से जुड़ी परेशानी झेलने को मजबूर हैं। बड़े पैमाने पर ग्राहकों की शिकायत है कि नए कार्ड बैंकों की ओर से जारी नहीं किए जा रहे हैं, जो पुराने ग्राहक हैं उन्हें भी लेनदेन से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बारे में बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े जानकार क्या कह रहे हैं, आइए जानते हैं। 
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क्रेडिट कार्ड। - फोटो : Freepik
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विस्तार
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क्रेडिट व डेबिट कार्ड से जुड़े डेटा लीक होने की खबरों के बीच बैंकों की ओर से मास्टरकार्ड और वीजा पर आधारित कार्ड जारी करना बंद करने की अटकलें हैं। इस बीच ग्राहकों को भी परेशानी झेलने से जुड़ी जानकारी सामने आ रही हैं। कई ग्राहकों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि प्रमुख बैंक मास्टरकार्ड व वीजा से जुड़े डेबिट और क्रेडिट कार्ड नहीं जारी कर रहे हैं। वहीं मौजूदा कार्ड ग्राहकों को भी इसके संचालन से जुड़ी कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। बड़े पैमाने पर ग्राहकों के कार्ड एक्सपायर होने के बाद उन्हें नए कार्ड नहीं मिल पा रहे हैं। उससे भी बड़ी दिक्कत यह है कि ग्राहकों को बैंकों की ओर से न तो कोई मदद ही नहीं मिल पा रही है न ही कोई आधिकारिक जानकारी।

पहले भी विवादों में रहा है मास्टरकार्ड

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मास्टरकार्ड पर 2021 में भी कार्रवाई की थी। डेटा स्थानीयकरण मानदंडों का पालन न करने के कारण मास्टरकार्ड को भारत में नए ग्राहकों को शामिल करने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। जुलाई 2021 से जून 2022 तक चले इस प्रतिबंध के दौरान मास्टरकार्ड को घरेलू ग्राहकों को नए डेबिट, क्रेडिट या प्रीपेड कार्ड जारी करने से रोक दिया गया था। मास्टरकार्ड की ओर से संतोषजनक अनुपालन सुनिश्चित करने करने के बाद जून 2022 में यह प्रतिबंध हटा दिया गया था।

परेशानी झेलने को मजबूर मास्टरकार्ड ग्राहक, नहीं हो रहा समाधान

बैंकिंग जगत से जुड़े जानकारों का दावा है कि बैंकों की ओर से जारी होने वाले डेबिट और क्रेडिट कार्ड के मामले में पिछले कुछ समय से बड़े पैमाने पर ग्राहक परेशान हैं, खासकर, मास्टरकार्ड के ग्राहक। ऐसी स्थिति बनी है डेटा लीक होने से जुड़ी अटकलें सामने आने के बाद। बड़े पैमाने पर मौजूदा ग्राहकों ने संचालन से जुड़ी परेशानी झेलने की भी शिकायत की है। हालांकि, मास्टरकार्ड और बैंक इस बारे में आधिकारिक तौर पर कुछ भी टिप्पणी करने से बच रहे हैं। कोटक महिन्द्रा बैंक से जुड़े एक आधिकारिक सूत्र ने अमर उजाला डॉटकॉम से बातचीत में बताया कि सभी बैंकों को डेबिट और क्रेडिट कार्ड जारी करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का पालन करना होता है, तब ही वह बैंक डेबिट और क्रेडिट कार्ड जारी कर सकता है।

क्या आरबीआई जांच के कारण मास्टकरकार्ड ग्राहकों को हो रही परेशानी?

उन्होंने बताया कि इसके लिए आरबीआई बैंकों के आईटी विभाग का ऑडिट करता है, जिसमें यह देखा जाता है कि खाताधारकों का डेटा सुरक्षित रखने के लिए बैंक कितनी सुरक्ष लेयर का इस्तेमाल करता है और बैंक का डेटा कितना सुरक्षित है। आरबीआई इसके लिए बैंकों के आईटी विभाग का तीन बार ऑडिट करता है, जिसमें डेटा से जुड़ी सभी पुख्ता जानकारी देखी और जांची जाती है। यदि बैंक की सुरक्षा लेयर अच्छी और मजबूत है, तब ही वह डेबिट व क्रेडिट कार्ड जारी कर सकता है। अगर इन तीनों ऑडिट में से कहीं भी कोई कमी मिलती है, तो वह बैंक किसी भी तरह के क्रेडिट और डेबिट कार्ड खाताधारकों को जारी नहीं कर सकता है। बैंकों को इन तीनों आईटी ऑडिट को पास करना पड़ता है। सूत्रों का दावा है कि संभवत: मास्टरकार्ड से जुड़े प्रकरण में भी ऐसा ही कोई मामला अंदरखाने चल रहा है, जिसकी जांच हो रही है और शायद इसी कारण ग्राहकों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।  

आरबीआई समय-समय पर कई बैंकों पर कर चुका है कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, कोटक महिन्द्रा बैंक पर भी आरबीआई की ओर से इसी तरह का प्रतिबंध कुछ समय पहले लगा था, जिसके बाद बैंक की ओर से सभी डेटा सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को ठीक किया गया और अब बैंक पर से सभी प्रतिबंध समाप्त हो गए हैं। इंडियन बैंक एसोसिएशन के एक अधिकारी बताते हैं कि फिलहाल एचडीएफसी और बैंक ऑफ बड़ौदा में खाताधारकों को कार्ड से जुड़ी परेशानी झेलने की खबरें हैं। इनमें क्रेडिट और डेबिट कार्ड तरह के ग्राहक शामिल हैं। वे कहते हैं, इससे पहले कोटक महिन्द्रा बैंक और कुछ मध्यम दर्जे के बैंकों यह प्रतिबंध था, लेकिन उन बैंकों ने अपने आईटी विभाग को अधिक सुरक्षित कर आरबीआई के निर्देशों का पालन किया और वे अब सभी बैंकिंग सुविधाएं अपने ग्राहकों को दे रहे हैं। हालांकि मास्टरकार्ड के कुछ ग्राहकों के मामले में उन्हें अब भी परेशानी झेलनी पड़ रही है, ऐसा दावा किया जा रहा है।

कई बार बैंकों के अंदरखाने से ही डेटा लीक की खबरें सामने आईं

उनका कहना है कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, डेटा चोरी की कई घटनाओं की जांच में यह पाया गया है कि कई बार बैंक के अंदर से ही डेटा लीक किया जाता है। इसके बाद कार्रवाई होती है, और खामियाजा ग्राहकों को ही झेलना पड़ता है। इसके पीछे का कारण यह है कि छोटे बैंक ही नहीं बड़े बैंक भी अपने आईटी विभाग के काम को आउटसोर्स करते हैं, यानी तीसरी पार्टी का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें डेटा चोरी होने की गुंजाइश अधिक होती है। इसके लिए बैंकों को अब आईटी विभाग का विस्तार करना होता है, इससे डेटा बैंक के अंदर सुरक्षित रहता है। इसे लेकर आरबीआई लगातार तीन बार आईटी विभाग का ऑडिट करता है, यदि बैंक इसमें चूक जाते हैं तो वे क्रेडिट और डेबिट कार्ड जारी नहीं कर सकते। ऐसे में ग्राहकों का डेटा बाहर जाने, चोरी होने का खतरा अधिक होता है।  

बैंक आधिकारिक तौर पर टिप्पणी करने से बच रहे, मास्टरकार्ड के जवाब का इंतजार

वरिष्ठ सीए वजीएसटी विशेषज्ञ मनीष गाडिया के अनुसार, आरबीआई हर तिमाही में बैंकों के सभी विभाग का ऑडिट करती है, जिसमें यदि बैंक का कोई भी विभाग डिफॉल्ट करता है, तो उन पर काफी भारी जुर्माना आरबीआई लगाती है। पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई ने बैंकों पर अपनी निगरानी काफी मजबूत की है, जिसकी वजह से एनपीए और बैंकों से जुड़ी अनियमितता कम हुई है। इस विषय पर आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी स्थिति साफ कहते हुए कही है कि उनके यहां ऐसी कोई परेशानी नहीं है। वहीं देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने इस बारे में फिलहाल कोई भी टिप्पणी करने से इनकार किया है। मास्टरकार्ड इंडिया को ग्राहकों को हाल के दिनों में होने वाली परेशानियों पर बात करने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई है, पर फिलहाल उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है।

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