अंतरराष्ट्रीय बिक्री के दम पर देश के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों ने आठ महीने के निचले स्तर से उबरते हुए एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा, अर्थव्यवस्था की परिचालन स्थितियों में व्यापक सुधार से विनिर्माण पीएमआई में पिछले महीने काफी वृद्धि हुई है।
तेजी से बढ़ते नए ऑर्डर और अंतरराष्ट्रीय बिक्री के दम पर देश के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों ने आठ महीने के निचले स्तर से उबरते हुए फिर रफ्तार पकड़ ली है। सोमवार को जारी एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) अक्तूबर, 2024 में बढ़कर 57.5 पहुंच गया। सितंबर में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर गिरकर आठ महीने के निचले स्तर 56.5 पर आ गई थी।
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प्रांजुल भंडारी का बयान
एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा, अर्थव्यवस्था की परिचालन स्थितियों में व्यापक सुधार से विनिर्माण पीएमआई में पिछले महीने काफी वृद्धि हुई है। नए ऑर्डर और अंतरराष्ट्रीय बिक्री भारत के विनिर्माण क्षेत्र के लिए मांग में मजबूत वृद्धि का संकेत है। इससे भारतीय विनिर्माता भी भविष्य में उत्पादन की मात्रा को लेकर अधिक आशावादी दिख रहे हैं।
अमेरिका व यूरोप समेत इन देशों से मिले ऑर्डर
सितंबर में डेढ़ साल में सबसे कम वृद्धि के बाद अक्तूबर में नए निर्यात ऑर्डर में मजबूत वृद्धि देखी गई। एशिया, यूरोप, लैटिन अमेरिका और अमेरिका समेत अन्य देशों से भारतीय विनिर्माण कंपनियों को अधिक नए ऑर्डर मिले हैं।
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नई नियुक्तियों में तेज वृद्धि
मांग को पूरा करने के लिए कंपनियों ने तीसरी तिमाही की शुरुआत में अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती की। नियुक्तियों की रफ्तार सितंबर की तुलना में अधिक थी।
सौर क्षेत्र में 500 अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद
वैश्विक स्तर पर सौर क्षेत्र में इस साल तक 500 अरब डॉलर के निवेश होने की उम्मीद है। 2023 में यह 393 अरब डॉलर था। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, सौर कई क्षेत्रों में कोयले व गैस को पीछे छोड़ते हुए
किफायती ऊर्जा स्रोत है।
जोशी ने सोमवार को एक कार्यक्रम में कहा, इस निवेश से सौर क्षेत्र में न सिर्फ नई क्षमता जुड़ रही है बल्कि दुनियाभर में सौर ऊर्जा की लागत भी कम हो रही है। वैश्विक सौर निवेश 2018 में 144 अरब डॉलर था।