सो रहे मनमोहन सिंह को जगाकर वित्त मंत्री बनने के लिए मनाया गया
भारत की ओर से अस्सी के दशक में लिए गए अल्पकालीन ऋण की ब्याज दर बढ़ गई थी। महंगाई दर बढ़ कर 16.7 फ़ीसदी हो गई थी। इन कठिन आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए तत्कालीन पीएम पीवी नरसिम्हा राव अपने मंत्रिमंडल में एक पेशेवर अर्थशास्त्री को बतौर वित्त मंत्री रखना चाहते थे। उन्होंने अपने दोस्त और इंदिरा गांधी के प्रधान सचिव रहे पीसी अलेक्ज़ेंडर से इस बारे में बात की। पीसी ने रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर आईजी पटेल और मनमोहन सिंह के नाम सुझाए। अलेक्ज़ेंडर मनमोहन सिंह के पक्ष में थे, इसलिए राव ने उन्हें ही मनमोहन सिंह को मनाने की ज़िम्मेदारी दे दी। पीसी एलेक्ज़ेंडर ने अपनी आत्मकथा 'थ्रू द कोरीडोर्स ऑफ़ पावर एन इनसाइडर्स स्टोरी' में लिखा, "20 जून को ही मैंने मनमोहन सिंह के घर फ़ोन लगाया। उनके नौकर ने मुझे बताया कि वो यूरोप गए हुए हैं और आज देर रात लौंटेंगे। 21 जून की सुबह साढ़े पांच बजे जब मैंने उन्हें फ़ोन किया तो उनके नौकर ने कहा कि साहब गहरी नींद में हैं। उन्हें जगाया नहीं जा सकता। मेरे बहुत जोर देने पर उसने मनमोहन लिंह को जगा दिया और वो फ़ोन लाइन पर आए। मैंने उनसे कहा कि मेरा आप से मिलना बहुत ज़रूरी है. मैं कुछ ही मिनटों में आपके घर पहुंच रहा हूँ। जब मैं उनके घर पहुंचा तो मनमोहन सिंह दोबारा सो चुके थे।" बकौल अलेक्जेंडर, मनमोहन सिंह को फिर किसी तरह जगाया गया। अलेक्जेंडर ने उनको नरसिम्हा राव का संदेश दिया कि वो उन्हें वित्त मंत्री बनाना चाहते हैं। सिंह ने अलेक्जेंडर पूछा, आपकी राय क्या है ? जवाब मिला, "अगर मैं इसके खिलाफ़ होता तो इतने अस्वाभाविक समय पर आपसे मिलने न आता।"
वित्त मंत्री की कुर्सी मनमोहन को सौंप कर पीएम राव ने साफ कह दी थी यह बात
शपथ लेने से पहले नरसिम्हा राव ने मनमोहन सिंह से कहा था, "मैं आपको काम करने की पूरी आज़ादी दूंगा। अगर हमारी नीतियाँ सफल होती हैं तो हम सब उसका श्रेय लेंगे। लेकिन अगर हम असफल होते हैं तो आपको जाना पड़ेगा।" 24 जुलाई, 1991 को दिल्ली में भयानक गर्मी थी। पहली बार नेहरू जैकेट पहने और आसमानी रंग की पगड़ी बाँधे हुए मनमोहन सिंह ने अपने भाषण की शुरुआत में कहा कि वो राजीव गांधी के आकर्षक और मुस्कराते हुए चेहरे को मिस कर रहे हैं। जयराम रमेश ने अपनी एक किताब में लिखा है, 'उन्होंने अपने पूरे भाषण के दौरान उस परिवार का बार बार नाम लिया जिसकी नीतियों और विचारधारा को वो अपने बजट के माध्यम से सिरे से पलट रहे थे।' मनमोहन सिंह ने अपने बजट में न सिर्फ़ खाद पर दी जा रही सब्सिडी को 40 फ़ीसदी कम किया बल्कि चीनी और एलपीजी सिलेंडर के दाम भी बढ़ा दिए। उन्होंने अपने भाषण का अंत विक्टर ह्यूगो की मशहूर पंक्ति से किया, 'उस विचार को कोई नहीं रोक सकता जिसका समय आ पहुंचा हो।' इस तरह नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह ने मिल कर लाइसेंस राज के तीन स्तंभों- सार्वजनिक क्षेत्र का एकाधिकार, निजी कारोबार को सीमित करना और विश्व बाज़ार से अलगाव को ध्वस्त कर दिया था।