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Explainer: महंगे क्रूड के कारण बड़ा फैसला; E22 से E30 इथेनॉल वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य, जानिए मतलब

Thu, 11 Jun 2026 11:31 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र सरकार ने E22 से E30 इथेनॉल ब्लेंड वाले पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी शून्य कर दी है। क्रूड ऑयल आयात में कमी, पेट्रोल की कीमतों और अर्थव्यवस्था पर इस फैसले का क्या असर होगा, जानने के लिए पढ़ें खबर।
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इथेनॉल टैक्स फ्री - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल क्रूड ऑयल की अस्थिर कीमतों के बीच, केंद्र सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्रालय ने एक नई अधिसूचना जारी कर उच्च इथेनॉल मिश्रण (22% से 30%) वाले पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क को पूरी तरह खत्म कर दिया है। यह ऐतिहासिक फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत कच्चे तेल के आयात पर अपनी भारी निर्भरता कम करने और 'ग्रीन एनर्जी' (हरित ऊर्जा) की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

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आइए समझते हैं कि सरकार के इस फैसले के क्या मायने हैं और बाजार पर इसका क्या असर होगा।

सरकार ने पेट्रोल पर क्या नई छूट दी है?

वित्त मंत्रालय की आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, 22 प्रतिशत से लेकर 30 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल (यानी E22, E25, E27 और E30) पर अब कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। यह शुल्क अब शून्य कर दिया गया है। भारत के महत्वकांक्षी बायोफ्यूल प्रोग्राम के तहत E20 (20% इथेनॉल) से ऊपर के ब्लेंड पर दिया गया यह पहला बड़ा वित्तीय प्रोत्साहन है। 

इस फैसले की टाइमिंग बाजार के लिहाज से इतनी अहम क्यों है?

बाजार के मौजूदा हालात को देखें तो मई के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 7.50 रुपये प्रति लीटर का तेज उछाल आया था। इससे पहले मार्च में भी सरकार ने 1 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व का नुकसान सहते हुए पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की ड्यूटी घटाई थी, ताकि जनता को ग्लोबल बाजार की महंगाई से बचाया जा सके।

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इसके अलावा तकनीकी मोर्चे पर 15 मई 2026 से भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने E22 से E30 पेट्रोल ब्लेंड के लिए नए गुणवत्ता मानक लागू कर दिए हैं। मानक तय होने के तुरंत बाद एक्साइज ड्यूटी हटना इस सेगमेंट में एक सुनियोजित तैयारी का संकेत है।

अर्थव्यवस्था और किसानों को इससे क्या बड़ा फायदा होगा?

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी जरूरत का 87% जीवाश्म ईंधन आयात करता है। इस नीतिगत फैसले से देश को निम्नलिखित फायदे होंगे:

  • आयात में कमी: महंगे क्रूड ऑयल का आयात घटेगा, जिससे विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट: ईंधन आयात पर खर्च होने वाला पैसा देश में ही रहेगा, जो सीधे तौर पर गन्ना किसानों, ग्रामीण युवाओं और कृषि क्षेत्र को आर्थिक रूप से मजबूत करेगा।
  • पर्यावरण सुरक्षा: इथेनॉल एक स्वच्छ और 'ग्रीन फ्यूल' है, जिसके उपयोग से प्रदूषण के स्तर में भारी कमी आएगी।

क्या इथेनॉल वाला पेट्रोल ग्राहकों को सस्ता मिलेगा?

यह उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा सवाल है। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इथेनॉल की औसत खरीद लागत 71.32 रुपये प्रति लीटर है (जीएसटी और ट्रांसपोर्टेशन सहित), जो रिफाइंड पेट्रोल की लागत से अधिक हो चुकी है। इसलिए ज्यादा ब्लेंडिंग के बावजूद खुदरा कीमतों में बड़ी गिरावट करना कंपनियों के लिए एक चुनौती है। हालांकि, सरकार ने हाल ही में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए 85% इथेनॉल वाला 'E85' फ्यूल लॉन्च किया है, जो सार्वजनिक क्षेत्र के 48 पेट्रोल पंपों पर E20 ईंधन की तुलना में 20 रुपये प्रति लीटर सस्ता बेचा जा रहा है।

क्या इथेनॉल वाले पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों को कोई नुकसान हो सकता है?

कई वाहन मालिकों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या ज्यादा इथेनॉल वाले पेट्रोल (E20 या उससे ज्यादा) के इस्तेमाल से उनकी पुरानी गाड़ियों की माइलेज या इंजन की परफॉर्मेंस पर कोई बुरा असर पड़ेगा। इस पर वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन (SIAM) ने स्पष्ट किया है कि पुरानी गाड़ियों के माइलेज में थोड़ी बहुत कमी जरूर आ सकती है, लेकिन इससे सुरक्षा को लेकर कोई खतरा नहीं है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी इन चिंताओं को खारिज करते हुए कहा है कि फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों को पेट्रोल और इथेनॉल दोनों पर चलाया जा सकता है, और इथेनॉल की परफॉर्मेंस आम पेट्रोल के मुकाबले कहीं से भी कमतर नहीं है।

पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के लक्ष्य में भारत अभी किस मुकाम पर है?

भारत का इथेनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) प्रोग्राम तय समय से काफी आगे चल रहा है। पहले सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल (E20) मिलाने का लक्ष्य 2030 तक रखा था, जिसे बाद में घटाकर 2025-26 कर दिया गया। अगर हालिया आंकड़ों की बात करें तो भारत ने 2022-23 में 12.06% और 2023-24 में 14.60% इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य पूरा कर लिया था। सबसे अच्छी बात यह है कि 28 फरवरी 2025 तक ही देश 17.98% ब्लेंडिंग का शानदार आंकड़ा हासिल कर चुका है। 

ईंधनों में ज्यादा इथेनॉल मिलाने पर क्वालिटी की गारंटी कैसे मिलेगी?

ग्राहकों को बेहतर और सुरक्षित ईंधन मिले, इसके लिए सरकार ने टैक्स छूट देने से पहले ही तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली थीं। इसी साल 15 मई 2026 से भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने E22, E25, E27 और E30 ब्लेंड वाले पेट्रोल के लिए नए क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (IS 19850:2026) लागू कर दिए हैं। इन नए मानकों में इथेनॉल की मात्रा, ऑक्टेन रेटिंग, सल्फर की सीमा और सुरक्षा के सभी नियमों को स्पष्ट रूप से तय कर दिया गया है। 

क्या कोई ग्राहक सिर्फ 'बिना इथेनॉल वाला' सादा पेट्रोल मांग सकता है?

इथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर शुरुआत में कुछ विवाद भी सामने आए थे। सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट में E20 ईंधन को देश भर में लागू करने के खिलाफ एक याचिका भी दायर की गई थी, जिसे शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके अलावा, कुछ लोगों ने यह भी मांग की थी कि पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल वाले पेट्रोल के साथ-साथ 'बिना इथेनॉल वाला सादा पेट्रोल' भी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। हालांकि, सरकार ने इस मांग को साफ तौर पर ठुकरा दिया है और कहा है कि यह फैसला काफी सोच-विचार कर और किसानों के आर्थिक फायदे को देखते हुए लिया गया है।

भारत सरकार ने 2025-26 तक 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य रखा था और फरवरी 2025 तक ही 17.98% का शानदार आंकड़ा छू लिया है। एक्साइज ड्यूटी की यह नई छूट बताती है कि सरकार भविष्य (E30 और उससे आगे) के लिए पूरी तरह तैयार है। यह कदम न केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर को 'फ्लेक्स-फ्यूल' तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का एक मजबूत रोडमैप भी है।

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खुदरा बाजार में तुरंत नहीं मिलेगा ज्यादा इथेनॉल वाला ईंधन, आगे के लिए तैयार की जा रही जमीन

  • केंद्र के 22 से 30 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क खत्म करने का सीधा फायदा ग्राहकों को तत्काल नहीं मिलने जा रहा है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड के अधिकारियों ने साफ किया है कि उत्पाद शुल्क शून्य करने को लेकर जारी अधिसूचना का मतलब यह नहीं है कि कल से ही पेट्रोल पंपों पर 30 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल मिलने लगेगा।
  • खुदरा बाजार में इसे उतारने से पहले व्यापक परीक्षण और सभी पक्षों से बातचीत होगी। लेकिन, जब भी यह बाजार में आएगा, कर छूट के कारण सामान्य पेट्रोल से सस्ता विकल्प साबित हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम भविष्य में अधिक इथेनॉल वाले ईंधन को बाजार में उतारने के लिए कानूनी और विनियामक रास्ता साफ करने के लिए उठाया गया है।
  • पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से क्रूड आयात में भारी कमी आएगी, जिससे देश की विदेशी मुद्रा बचेगी। इसके इस्तेमाल से गाड़ियों के कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। उत्पाद शुल्क में छूट के जरिये सरकार ग्राहकों को इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहती है। n बोनस डेस्क
  • अब जब सरकार 30 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की ओर कदम बढ़ा रही है, तो ऐसे में वाहन कंपनियों को अपने इंजनों की सामग्री और फ्यूल लाइनों में भी बदलाव करना होगा, ताकि वे बिना किसी खराबी के इतने उच्च मिश्रण को झेल सकें। मारुति सुजुकी और हीरो मोटर्स ने फ्लेक्स फ्यूल इंजन वाले वाहन पेश किए हैं। अन्य कंपनियां भी इस पर काम कर रही हैं।
  • पेट्रोल मिश्रण सीमा 30 फीसदी तक जाने का मतलब है कि चीनी मिलों के लिए इथेनॉल की मांग कई गुना बढ़ेगी। इससे चीनी कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और किसानों को समय पर गन्ना भुगतान मिलेगा।
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