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कॉरपोरेट कानूनों में बड़ा बदलाव: निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में पेश किया संशोधन बिल, जानें क्या बदलेगा

Mon, 23 Mar 2026 10:49 AM IST
Riya Dubey बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्र सरकार कॉरपोरेट लॉज (संशोधन) बिल, 2026 के जरिए कारोबार को आसान बनाने की दिशा में कदम उठा रही है। वित्त मंत्री आज लोकसभा में यह बिल पेश किया। आइए विस्तार से जानते हैं। 
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निर्मला सीतारमण - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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केंद्र सरकार कारोबारियों के लिए माहौल को और सरल बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज लोकसभा में कॉरपोरेट लॉज (संशोधन) बिल, 2026 पेश किया। इस बिल का मकसद छोटे कारोबारियों, स्टार्टअप्स और किसानों की उत्पादक कंपनियों के लिए नियमों को आसान बनाना और गैर-जरूरी कानूनी जटिलताओं को कम करना है।

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लोकसभा के एजेंडा के अनुसार, यह विधेयक सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 और कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन करने के लिए लाया जा रहा है। गौरतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट ने इस बिल को 10 मार्च को मंजूरी दे दी थी।

क्या हैं बिल के मुख्य प्रावधान?

इस प्रस्तावित कानून का मुख्य फोकस है:

  • छोटे-मोटे अपराधों को डी-क्रिमिनलाइज (अपराध की श्रेणी से बाहर) करना है।
  • कुछ आपराधिक प्रावधानों की जगह सिविल पेनल्टी (जुर्माना) लागू करना है।
  • छोटे व्यवसायों, स्टार्टअप्स और किसान उत्पादक कंपनियों के लिए कंप्लायंस बोझ कम करना है।
  • कंपनियों के लिए व्यापार करने में आसानी के साथ जीवन की सुगमता को बढ़ावा देना है।

क्यों जरूरी हैं ये बदलाव?

सरकार का मानना है कि कई मामलों में मामूली प्रक्रियात्मक चूक को आपराधिक अपराध मानना व्यवसायों के लिए अनावश्यक दबाव पैदा करता है। ऐसे प्रावधानों को हटाकर या सरल बनाकर कंपनियों को अधिक लचीलापन दिया जाएगा।

पहले भी हो चुके हैं बदलाव

कंपनी अधिनियम, 2013 में 2015 के बाद से अब तक चार बार संशोधन किए जा चुके हैं, ताकि नियमों को सरल बनाया जा सके। एलएलपी अधिनियम, 2008 में भी 2021 में इसी दिशा में बदलाव किए गए थे।

वित्त विधेयक हुआ पेश

इसे साथ ही वित्त मंत्री ने लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 पेश किया। यह विधेयक इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके पारित होने के बाद केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित विभिन्न प्रस्तावों को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। विधेयक के लागू होने पर आयकर दरों में बदलाव, सीमा शुल्क और उत्पाद शुल्क से जुड़े संशोधन प्रभावी हो जाएंगे। इससे सरकार की कर और राजस्व से जुड़ी नीतियों को औपचारिक रूप से लागू करने का रास्ता साफ होगा।

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