महाराष्ट्र सरकार भूमि विखंडन कानून में ढील देकर और धीरे-धीरे उसे समाप्त करके एक जनवरी 2025 तक उपविभाजित भूमि खंडों को कानूनी दर्जा प्रदान करेगी। राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुधवार को विधानसभा में इसकी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि भूमि विखंडन नियमों से पैदा हुए मुद्दों से 50 लाख से अधिक परिवार प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि जनवरी 2025 से पहले बने एक गुंठा (लगभग 1,089 वर्ग फीट) आकार तक के भूखंडों को कानूनी माना जाएगा, जिससे नागरिकों को आधिकारिक संपत्ति अधिकार प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
जनवरी के बाद विभाजित किए गए भूखंडों को विकास प्राधिकरण के मानदंडों का कड़ाई से पालन करना होगा। मंत्री ने कहा कि इस "क्रांतिकारी कदम" (विभाजित भूखंडों को कानूनी मान्यता देने के लिए) का उद्देश्य संपत्ति पंजीकरण, निर्माण अनुमति और स्वामित्व से संबंधित कानूनी बाधाओं को दूर करना है, जो महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम और भूमि विखंडन कानून के उल्लंघन से उत्पन्न हुई हैं।
जोत विखंडन एवं चकबंदी अधिनियम का उद्देश्य कृषि भूमि को अलाभकारी छोटे भूखंडों (खंडों) में विभाजित होने से रोकना तथा बेहतर खेती के लिए मौजूदा खंडित जोतों को समेकित करना है। यह टुकड़ों के हस्तांतरण और विभाजन को प्रतिबंधित करता है तथा कृषि दक्षता बढ़ाने के लिए जोतों के समेकन का प्रावधान करता है।
विधायक अमोल खटल की ओर से उठाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा, "कानून को शिथिल करने और धीरे-धीरे समाप्त करने तथा लेआउट अनुमोदन, सड़क पहुंच, भूमि पंजीकरण और भवन अनुमति पर स्पष्टता प्रदान करने के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को अंतिम रूप दिया जाएगा और 15 दिनों के भीतर इसकी घोषणा की जाएगी।"
उन्होंने कहा कि राजस्व और शहरी विकास विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों, निपटान आयुक्त और पंजीकरण महानिरीक्षक की चार सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा, जो राज्य भर में स्थानीय परिस्थितियों की समीक्षा के बाद एसओपी का मसौदा तैयार करेगी। बिचौलियों की ओर से किसी भी प्रकार के दुरुपयोग या हस्तक्षेप को रोकने के लिए एसओपी को पारदर्शी तरीके से लागू किया जाएगा।