वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि जीएसटी 2.0 में 12 फीसदी जीएसटी स्लैब के तहत आने वाली 99 फीसदी वस्तुओं पर पांच फीसदी कर लगाया गया है। इस परिणामस्वरूप 28 फीसदी कर स्लैब में आने वाली 90 फीसदी वस्तुएं 18 फीसदी के दायरे में आ गई हैं। यह सुधार अर्थव्यवस्था पर उच्च ट्रैरिफ के असर को कम करने में लाभकारी साबित होगा। साथ ही, लोगों के हाथ में पैसा आएगा और वे त्योहारों में खर्च करेंगे, जिससे अर्थव्यवस्था में दो लाख करोड़ रुपये आएंगे। वहीं, फिक्की की तस्करी एवं जालसाजी गतिविधियों के खिलाफ काम करने वाली समिति (कैस्केड) का कहना है कि जीएसटी सुधारों से परिवारों पर टैक्स के बोझ में कमी आएगी। उल्टे शुल्क ढांचे के कारण होने वाली विकृतियां दूर होने से एमएसएमई को भी अपना कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी।
खेती-किसानी : लागत घटने से बढ़ेगी किसानों की आय
ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, थ्रेशर, पावर टीलर और अन्य कृषि उपकरण सस्ते हो गए हैं, क्योंकि सरकार ने इन पर जीएसटी दर को 18 फीसदी और 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। संशोधित दर लागू होने से खेती-किसानी में इस्तेमाल होने वाले फर्टिलाइजर ड्रिल, ट्रैक्टर से लेकर हार्वेस्टर जैसे कृषि उपकरण 3,200 रुपये से लेकर 1.87 लाख रुपये तक सस्ते हो जाएंगे।
63,000 तक सस्ते होंगे ट्रैक्टर
- 35 एचपी ट्रैक्टर 41,000 रुपये
- 45 एचपी ट्रैक्टर 45,000 रुपये
- 50 एचपी ट्रैक्टर 53,000 रुपये
- 75 एचपी ट्रैक्टर 63,000 रुपये
- धान रोपण मशीन 15,400 रुपये
- थ्रेशर (4 टन/घंटा क्षमता) 14,000 रुपये
- पावर वीडर 7.5 एचपी 5,495 रुपये
- सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल 10,500 रुपये तक
- हार्वेस्टर कंबाइन 1,87,500 रुपये
सीमेंट : सस्ता होने से घटेगी घर बनवाने की लागत
जीएसटी दरों में बदलाव से सीमेंट की 50 किलो की बोरी के दाम 30-35 रुपये तक घटने की उम्मीद है। इससे मकानों और अन्य आवासीय परियोजनाओं की निर्माण लागत में भी कमी आएगी। जीएसटी परिषद के फैसले के अनुरूप अब सीमेंट पर कर दर 28 से घटकर 18 फीसदी रह गई है।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी दरों में कटौती से सीमेंट कंपनियों में प्रतिस्पर्धा होगी, जिससे वे कर दरों में कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाएंगी। इससे न सिर्फ सीमेंट की कीमतों में नरमी आएगी, बल्कि बुनियादी ढांचा और आवासीय परियोजनाओं की लागत भी घटेगी।
शिक्षा : स्टेशनरी के उत्पाद सस्ते, पढ़ाई का घटेगा खर्च
कॉपी, किताबें, पेंसिल, शार्पनर, रब, ग्लोब और अन्य स्टेशनरी सामान पर अब कोई जीएसटी नहीं लगेगा। इससे न सिर्फ शिक्षा पर खर्च घटेगा, बल्कि छात्रों और अभिभावकों को सीधी आर्थिक राहत मिलेगी। पहले इन वस्तुओं पर 5 से 12 फीसदी तक टैक्स लगता था, जिसकी वजह से इनकी कीमतें अधिक हो जाती थीं। उदाहरण के लिए...पहले 500 रुपये का ग्लोब 12 फीसदी जीएसटी जुड़ने पर 560 रुपये का पड़ता था। अब वही ग्लोब जीएसटी फ्री होकर करीब 446 रुपये में मिलेगा। इससे 114 रुपये की बचत होगी।
अब नहीं लगेगा टैक्स
उत्पाद पुरानी नई
मैप, चार्ट, ग्लोब 12% 00
पेंसिंल, शार्पनर, क्रेयान्स 12% 00
एक्सरसाइज एवं नोटबुक 12% 00
इरेजर 05% 00
क्रेयॉन, पेस्टल, टेलर चॉक 12% 00
ज्योमेट्री व कलर बॉक्स 12% 5%
होटल : कमरे सस्ते, भोजन पर भी मिलेगा लाभ
होटल में 7,500 रुपये या उससे कम किराये वाले कमरे सोमवार से 525 रुपये तक सस्ते हो गए हैं। आतिथ्य क्षेत्र के दिग्गजों ने कहा, होटल उद्योग के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के बिना जीएसटी दरों को 12 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी करने से वृद्धि को समर्थन मिलेगा।
जीएसटी कटौती से कमरे का किराया सात फीसदी सस्ता होगा। यात्रियों को भोजन पर लाभ भी मिलेगा। रेडिसन होटल समूह के दक्षिण एशिया के एमडी निखिल शर्मा ने कहा, इस कदम से राजस्व बढ़ेगा। निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। होटल देशभर में मेहमानों को बेहतर सेवाएं दे सकेंगे।
सरकार के खजाने पर भी ज्यादा बोझ नहीं : क्रिसिल
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल का कहना है कि दरों में बदलाव से सरकार पर खास राजकोषीय बोझ नहीं पड़ेगा। अल्पावधि में सरकारी खजाने को सालाना 48,000 करोड़ का शुद्ध नुकसान हो सकता है। बीते वित्त वर्ष 2024-25 में कुल जीएसटी संग्रह 10.6 लाख करोड़ रुपये रहा था। इसका मतलब है कि ज्यादा नुकसान होने की आशंका नहीं है।
जीएसटी दरों के युक्तिकरण से पहले सरकार को मिलने वाले राजस्व का अधिकांश हिस्सा (70 से 75 फीसदी) 18 फीसदी के कर स्लैब से आता था। सिर्फ पांच से छह फीसदी राजस्व 12 फीसदी वाले स्लैब से आता था और 28 फीसदी स्लैब से 13 से 15 फीसदी राजस्व आता था। दो स्लैब वाले जीएसटी से ज्यादा वस्तुओं और सेवाओं को औपचारिक दायरे में लाया जा सकता है। इससे मध्यम अवधि में टैक्स संग्रह को धीरे-धीरे बढ़ावा मिलेगा।