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दिसंबर से महंगा हो सकता है कर्ज: त्योहारों में मिलेगी राहत, जानें जीडीपी कब छुएगी आठ प्रतिशत ग्रोथ का आंकड़ा

सार

आरबीआई इस पॉलिसी में रेपो रेट स्थिर रख सकता है, लेकिन दिसंबर से 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के जरिए कुल 75 बेसिस पॉइंट तक रेट बढ़ने का अनुमान है। इससे रेपो रेट करीब 6 फीसदी हो सकता है। वहीं, भारत की जीडीपी ग्रोथ फिलहाल 7-7.2 फीसदी से बढ़कर आने वाले वर्षों में 8 फीसदी के पार जाने की उम्मीद है, हालांकि दूसरी छमाही में विकास दर थोड़ी धीमी पड़ सकती है।
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मदन सबनवीस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। हालांकि, यह राहत ज्यादा लंबी नहीं रहने वाली है। उनके मुताबिक, आरबीआई एक और मौद्रिक नीति बैठक में दरों को स्थिर रखने के बाद दिसंबर से ब्याज दरों में बढ़ोतरी शुरू कर सकता है। दूसरी ओर, भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर भी उनका अनुमान काफी सकारात्मक है। उनका कहना है कि देश की ग्रोथ आने वाले वर्षों में 8 फीसदी के स्तर तक पहुंच सकती है।

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अभी ब्याज दर बढ़ाने से बच सकता है आरबीआई
मदन सबनवीस के मुताबिक, आरबीआई एक और पॉलिसी में रेपो रेट को जस का तस रख सकता है और उसके बाद दिसंबर से दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू होने की संभावना है। फिलहाल महंगाई का जो सबसे ताजा आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध है, वह 4.8 फीसदी है और मौद्रिक नीति समिति अपने फैसले में इसी आंकड़े को आधार बनाएगी। त्योहारों का मौसम शुरू होने के समय केंद्रीय बैंक ब्याज दर बढ़ाने से फिलहाल बच सकता है। ऐसे में इस बैठक में रेट हाइक की संभावना कम है। सबनवीस का साफ अनुमान है कि मौजूदा पॉलिसी में ब्याज दर नहीं बढ़ेगी, लेकिन आगे के महीनों में तस्वीर बदल सकती है।

दिसंबर से शुरू हो सकता है रेट बढ़ाने का दौर
सबनवीस का अनुमान है कि दिसंबर में RBI करीब 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके बाद फरवरी में भी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी संभव है। इतना ही नहीं, अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में एक और 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। इस तरह पूरे चक्र में रेपो रेट करीब 75 बेसिस पॉइंट बढ़ सकता है और अंततः यह लगभग 6 फीसदी के स्तर तक पहुंच सकता है। उनके मुताबिक, अगर महंगाई करीब 5 फीसदी के आसपास रहती है और रेपो रेट 6 फीसदी तक पहुंचता है, तो वास्तविक ब्याज दर करीब 1 फीसदी होगी। मौजूदा परिस्थितियों में यह स्तर काफी उचित माना जा सकता है।
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भारत की ग्रोथ की रफ्तार बनी रहेगी तेज
देश की आर्थिक विकास दर को लेकर सबनवीस का कहना है कि भारत की GDP ग्रोथ फिलहाल 7 से 7.2 फीसदी की ऊंची दर पर बनी हुई है और आने वाले समय में इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है। उनके मुताबिक, भारत की विकास दर धीरे-धीरे 8 फीसदी के स्तर की ओर बढ़ेगी। हालांकि, यह लक्ष्य 2027-28 में हासिल होगा या 2028-29 में, यह कहना अभी मुश्किल है। इसकी बड़ी वजह वैश्विक माहौल को लेकर बनी अनिश्चितता है।

तेल, युद्ध और टैरिफ से बनी हुई है अनिश्चितता
भारत की ग्रोथ की राह में कई बाहरी चुनौतियां भी हैं। वैश्विक आर्थिक माहौल, कच्चे तेल की कीमतें, अलग-अलग देशों के बीच चल रहे युद्ध और व्यापार शुल्क यानी टैरिफ जैसे मुद्दे आगे की तस्वीर को प्रभावित कर सकते हैं। फिर भी सबनवीस का मानना है कि भारत की संभावित विकास दर करीब 8 फीसदी है और देश को जल्द ही इस स्तर को हासिल कर लेना चाहिए। उन्हें उम्मीद है कि अगर परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो 2027-28 में ही भारत 8 फीसदी के आसपास पहुंच सकता है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 2028-29 तक 8 फीसदी से ऊपर की ग्रोथ हासिल होने की उम्मीद है।

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दूसरी छमाही में  जीडीपी की रफ्तार पड़ सकती है थोड़ी धीमी
हालांकि, निकट अवधि में विकास दर में कुछ नरमी देखने को मिल सकती है। सबनवीस के अनुसार, साल की दूसरी छमाही में ग्रोथ की रफ्तार कुछ कम हो सकती है। पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही है। उनका अनुमान है कि दूसरी तिमाही में भी ग्रोथ मजबूत रह सकती है। हालांकि, यह 7.8 फीसदी तक नहीं पहुंच सकती और करीब 7.5 से 7.6 फीसदी के आसपास रहने की संभावना है।

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