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वित्त मंत्री ने की घोषणा, 400 जिलों में लगने जा रहा है 'लोन मेला'

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 20 Sep 2019 10:41 AM IST
Nirmala Sitharam
अर्थव्यवस्था और विशेषतौर पर गैर- बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) में नकदी की तंगी को लेकर बढ़ती चिंता के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा है कि आने वाले दिनों में देशभर में 400 जिलों में बैंकों, एनबीएफसी और खुदरा कर्ज लेने वालों की आमने सामने खुली बैठकें होंगी, जिनमें एनबीएफसी को बैंकों से खुले तौर पर नकदी उपलब्ध कराई जायेगी और वह उसे खुदरा कर्ज लेनदारों को वितरित करेंगे। 
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एमएसएमई को भी मिलेगा लाभ

इस तरह की बैठकें तीन अक्टूबर से शुरू होंगी। इनका मकसद मकान खरीदारों और किसानों समेत कर्ज चाहने वालों को ऋण सुलभ कराना है। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों ( MSME ) भी इन बैठकों में कर्ज सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। 

तीन अक्टूबर से शुरू होंगी बैठकें

वित्त मंत्री ने संवाददाता सम्मेलन में इन बैठकों के बारे में पहले चरण के लिये अब से लेकर 29 सितंबर और दूसरे चरण के लिये 10 से 15 अक्ट्रबर 2019 की तिथि बताई थी, जिसे बैंक प्रतिनिधियों की पुन: हुई बैठक में सलाह-मशविरा के बाद बदल दिया गया। अधिकारियों ने बाद में संवाददाताओं को बताया कि पहले चरण में इस तरह की बैठकें तीन से सात अक्टूबर को तथा दूसरे चरण में 11 अक्टूबर 2019 से अगले कुछ दिन तक होगी। 

त्योहारों में लोगों को मिलेगा ज्यादा कर्ज 

वित्त मंत्री ने कहा कि इसके पीछे सोच यह है कि त्योहारों के दौरान लोगों को ज्यादा-से-ज्यादा कर्ज देना सुनिश्चित किया जा सके। दिवाली अक्टूबर में है और इसे देश में खरीदारी का सबसे अच्छा समय माना जाता है।खुली बैठकों के दौरान खुदरा, कृषि और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों) और आवास एवं अन्य क्षेत्रों के लिये कर्ज उपलब्ध कराये जाएंगे।मंत्री ने बताया कि बैंकों से दबाव वाले किसी भी एमएसएमई कर्ज को 31 मार्च 2020 तक फंसा कर्ज (एनपीए) घोषित नहीं करने को कहा गया है।

MSME के दबाव वाले कर्ज को 2020 तक NPA घोषित न करें

सरकार ने बैंकों से कहा कि वे मार्च, 2020 तक एमएसएमई के दबाव वाले कर्ज को एनपीए घोषित नहीं करें। साथ ही सरकार ने बैंकों से एमएसएमई के कर्ज के पुनर्गठन पर काम करने को कहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संवाददाता सम्मेलन मे कहा कि रिजर्व बैंक की ओर से पहले ही परिपत्र जारी किया जा चुका है जिसमें कहा गया है कि एमएसएमई के दबाव वाले कर्ज को एनपीए घोषित नहीं किया जाए। 
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